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Monday, March 9, 2026
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Deepinder Goyal ने दिया इस्तीफा: Zomato के CEO पद से हटे, अब अलबिंदर ढींडसा के हाथ होगी कमान

दीपिंदर गोयल ने रिस्क लेने और नई चीज़ें आज़माने के लिए ग्रुप CEO पद से इस्तीफा दिया अब कंपनी की कमान अलबिंदर ढींडसा के हाथ में है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। ज़ोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने ग्रुप CEO के पद से इस्तीफा दे दिया। यह बदलाव कंपनी के बड़े लीडरशिप स्ट्रक्चर में हुआ है। शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मिलने के बाद दीपिंदर गोयल ने पद छोड़ते हुए कंपनी की अगुवाई अलबिंदर ढींडसा को सौंप दी है। अलबिंदर ढींडसा को तुरंत प्रभाव से ज़ोमैटो का नया ग्रुप CEO नियुक्त किया गया है।

दीपिंदर गोयल ने क्यों छोड़ा ग्रुप CEO पद?

दीपिंदर गोयल का मानना है कि उन्होंने ग्रुप CEO का पद छोड़कर नई चीज़ों को आज़माने और अधिक रिस्क लेने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि Eternal जैसी पब्लिक कंपनी के स्ट्रक्चर के बाहर यह कदम बेहतर तरीके से उठाया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी को ऐसे लीडर की ज़रूरत है जो मुख्य बिज़नेस पर फोकस करे और अनुशासन के साथ काम करे। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि दीपिंदर अब कंपनी की दैनिक ऑपरेशन्स से हटकर नई पहल और नवाचार में अपना समय लगाना चाहते हैं।

अलबिंदर ढींडसा कौन हैं?

दीपिंदर गोयल के स्थान पर ग्रुप CEO बनने वाले अलबिंदर ढींडसा, जिन्हें अल्बी के नाम से भी जाना जाता है, अब ज़ोमैटो की ऑपरेटिंग प्राथमिकताओं और बिज़नेस से जुड़े फैसलों के लिए ज़िम्मेदार होंगे। ढींडसा ने पहले ब्लिंकिट की खरीद से लेकर उसे ब्रेक-ईवन तक लाने में अपनी लीडरशिप दिखाई है। उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए यह तय किया गया है कि ब्लिंकिट परियोजना अब उनकी टॉप प्रायोरिटी रहेगी। अलबिंदर का अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण ज़ोमैटो को मुख्य बिज़नेस के लक्ष्यों तक पहुँचाने में सहायक माना जा रहा है।

लीडरशिप बदलाव का महत्व

ज़ोमैटो के इस नेतृत्व बदलाव से यह संकेत मिलता है कि कंपनी अब स्थिर और अनुशासित नेतृत्व के साथ अपने मुख्य बिज़नेस पर ध्यान केंद्रित करेगी। वहीं, दीपिंदर गोयल की नई भूमिका कंपनी के बाहरी और रिस्क भरे प्रोजेक्ट्स में नवाचार लाने में सहायक होगी। इस बदलाव से शेयरहोल्डर्स और कर्मचारियों में विश्वास बढ़ाने के साथ-साथ कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति को और मजबूती मिलेगी।

दीपिंदर गोयल ने ग्रुप CEO का पद छोड़कर नई चुनौतियों और जोखिम भरे प्रोजेक्ट्स की ओर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। अलबिंदर ढींडसा अब ज़ोमैटो के CEO के रूप में मुख्य बिज़नेस संचालन और रणनीतिक विकास की ज़िम्मेदारी संभालेंगे। यह बदलाव कंपनी की दीर्घकालिक स्थिरता और नवाचार को साथ लेकर आगे बढ़ने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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