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Tuesday, March 17, 2026
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Cars 24 के CEO ने हिंदी भाषी लोगों को दिया जॉब ऑफर, सोशल मीडिया पर जमकर मचा बवाल, कन्नड भाषा के अपमान का आरोप

दिल्ली-NCR की Cars 24 नामक कंपनी के CEO विक्रम चोपड़ा ने एक पोस्‍ट शेयर किया है। इस पोस्‍ट में उन्‍होंने नौकरी के लिए ऑफर देते हुए लिखा कि जिन्‍हें कन्‍नड़ बोलनी नहीं आती वे दिल्‍ली आ जाएं।

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली-एनसीआर स्थित एक कंपनी के सीईओ का सोशल मीडिया पर किया गया एक पोस्‍ट इन दिनों काफी चर्चा में है। दरअसल इस पोस्ट के माध्‍यम से बेंगलुरु में कन्नड़ नहीं बोल पाने को लेकर तंज कसा गया है। जानकारी के अनुसार दिल्ली-NCR की Cars 24 नामक कंपनी के सीईओ विक्रम चोपड़ा ने एक पोस्‍ट शेयर किया है। इस पोस्‍ट में उन्‍होंने नौकरी के लिए ऑफर देते हुए लिखा कि जिन्‍हें कन्‍नड़ बोलनी नहीं आती वे दिल्‍ली आ जाएं। इस पोस्‍ट के बाद से सोशल मीडिया पर जमकर बवाल मचा हुआ है। उन्‍होंने अपनी पोस्‍ट में हिंदी भाषी लोगों को दिल्‍ली में आकर नौकरी करने की सलाह दे डाली। उनकी इस पोस्‍ट पर सोशल मीडिया पर लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। 

बेंगलुरू में प्रवासियों को आती हैं ये दिक्‍कतें 

बेंगलुरू आईटी ही नहीं, स्टार्टअप और पुराने बिजनेस के कारण यहां लाखों जॉब के रास्‍ते मौजूद हैं। जिसके चलते यहां नौकरी तलाश में आने वाले प्रवासियों की संख्‍या बढ़ गई है। ऐसे में यहां बढ़ते ट्रैफिक जाम, बड़ी कीमत पर किराए का घर जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा बेंगलुरु में भाषा विवाद भी है। कुछ प्रवासी कन्नड़ भाषा नहीं सीख पाते जिसके कारण भी खुद को हाशिए पर महसूस करते हैं। यहां गैर-कन्नड़ भाषी लोगों को ऑटो रिक्शा ड्राइवर द्वारा सवारी से इनकार कर देते हैं, भाषा न बोलने के लिए दुकानों में अधिक पैसे वसूलने तक की कई घटनाएं भी सामने आई हैं। 

गैर-कन्‍नड़ भाषी लोगों की दुखती रग पर रखा हाथ 

विक्रम चोपड़ा की पोस्‍ट ने मानों बेंगलुरू में रह रहे गैर-कन्‍नड़ भाषी लोगों की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर उनकी पोस्‍ट जमकर वायरल हो गई है। उन्‍होंने बेंगलुरू में काम कर रहे इंजीनियरों को संबोधित करते हुए लिखा कि “घर के करीब” यानी दिल्ली एनसीआर में काम करना और रहना चाहते हैं। “बेंगलुरु में सालों बाद भी आप कन्नड़ नहीं बोल सकते? कोई बात नहीं। आ जाओ दिल्ली”।

भाषा को लेकर बेंगलुरु में होते रहे हैं विवाद

कर्नाटक में कन्नड़ भाषा को बढ़ावा देने की मुहिम ने वहां रह रहे दूसरे राज्यों के लोगों को कुछ कटु अनुभव भी दिए हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने साझा किया है कि उन्हें कन्नड़ भाषा न बोल पाने के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है । जिसमें टैक्सी चालकों द्वारा बैठाने से इनकार, अंग्रेजी में साइनबोर्ड्स पर तोड़फोड़, हिंदी बोलने वाले लोगों से अधिक पैसे वसूलने जैसी घटनाएं आम हैं।  

मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं सामने 

वहीं विक्रम चोपड़ा के इस मजाकिया अंदाज पर एक्स और लिंक्डइन जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक यूजर लिखा कि बेंगलुरु की भीड़भाड़ को कम करने के लिए चोपड़ा के प्रति आभार, उन्‍होंने सुझाव दिया कि अन्य व्यापारिक नेताओं को भी ऐसा ही रुख अपनाना चाहिए।

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