नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदर इन दिनों हलचल तेज हो गई है और इसका केंद्र बने हैं राघव चड्ढा (Raghav Chadha)। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को जिम्मेदारी सौंप दी है। इस फैसले के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और पार्टी के भीतर मतभेदों की चर्चा भी जोर पकड़ रही है।
Raghav Chadha को बोलने का समय आवंटित न हो-AAP
पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी कहा कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने का समय न दिया जाए। इस कदम को AAP के बड़े संगठनात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह साफ नहीं की गई है, जिससे कयास और भी बढ़ गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राघव चड्ढा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उन्हें “खामोश जरूर किया गया है, लेकिन वे हारे नहीं हैं।” उन्होंने दावा किया कि वे लगातार आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे।
सौरभ भारद्वाज ने भी साधा निशाना
दूसरी ओर, AAP के नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी अनुशासन और विचारधारा सबसे ऊपर है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि हर नेता को समय-समय पर अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं और यह एक सामान्य प्रक्रिया है। वहीं, कुछ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि राघव चड्ढा पिछले समय में पार्टी के मुख्य मुद्दों से दूर होते जा रहे थे। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए वीडियो जारी किया है।
इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर AAP को घेर रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला आगे क्या मोड़ लेता है और पार्टी के अंदर चल रही हलचल का असर आगामी राजनीति पर कितना पड़ता है।




