नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। संसद के नए भवन में मोदी सरकार के द्वारा लाया गया पहला विवादों में फंसता नजर आ रहा है। शुरुआत में यह अंदेशा लगाया जा रहा था कि महिला बिल पास हो जाएगा हालांकि बीतते समय के साथ यह भी राजनीति के भंवर में फंसता नजर आ रहा है। यह भी बता दें कि बिल पर कई पार्टियां श्रेय लेने में जुटी हैं। कांग्रेस इस बिल को अपना बता रही हैं वहीं भाजपा इसे अपना बिल बता कर आधी आबादी वोट बैंक पर नजर गड़ाए है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर में देश की राजनीति में यूपी जो काफी अहम स्थान रखता है वहां की पार्टी के प्रमुख क्या सोचते हैं , क्योंकि अगर बिल पास हो जाता है तो यहां पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। आइए जानते हैं सपा और बसपा का स्टैंड।
क्या है सपा प्रमुख अखिलेश का स्टैंड
केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की ओर से लोकसभा में पेश किये गये नारी वंदन बिल को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने महाझूठ करार दिया है। उन्होंने कहा है कि इसे लागू करने करने में सालों लग जाएंगे। ऐसे आपाधापी में महिलाओं से झूठ बोलने की क्या जरूरत थी। अखिलेश यादव ने बुधवार को सुबह ट्वीट किया, ‘नयी संसद के पहले दिन ही भाजपा सरकार ने ‘महाझूठ’ से अपनी पारी शुरू की है। जब जनगणना और परिसीमन के बिना महिला आरक्षण बिल लागू हो ही नहीं सकता, जिसमें कई साल लग जाएंगे, तो भाजपा सरकार को इस आपाधापी में महिलाओं से झूठ बोलने की क्या ज़रूरत थी। भाजपा सरकार न जनगणना के पक्ष में है न जातिगत गणना के, इसके बिना तो महिला आरक्षण संभव ही नहीं है। यह आधा-अधूरा बिल ‘महिला आरक्षण’ जैसे गंभीर विषय का उपहास है। इसका जवाब महिलाएं आगामी चुनावों में भाजपा के विरुद्ध वोट डालकर देंगी।’
बसपा की प्रमुख मायावती ने भी साफ किया अपना स्टैंड
संसद में पेश किए गए महिला आरक्षण बिल को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि आरक्षण पर भाजपा की नीयत साफ नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि संसद में पेश किए गए महिला आरक्षण को लागू होने पर अभी कई साल लग जाएंगे। यह बिल बिना जनगणना और परिसीमन के लागू नहीं हो सकता है। 2011 के बाद आज तक जनगणना नहीं हुई। जनगणना कराने में कई साल लग जाएंगे। जनगणना के बाद परिसीमन का काम होगा, जबकि भाजपा ने आरक्षण की सीमा 15 साल रखी है। कई चुनाव तक ये आरक्षण नहीं मिल पाएगा।





