सुकमा कलेक्टर ने निष्पक्ष जांच के आश्वासन के साथ दण्डाधिकारी जांच के दिये आदेश बीजापुर, 23 मई (हि.स.)। जिले के बासागुड़ा में बस्तर संभागायुक्त जीआर चुरेन्द्र, बस्तर आईजी सुंदरराज पी. सहित कलेक्टर बीजापुर रितेश कुमार अग्रवाल, कलेक्टर सुकमा विनीत नन्दनवार और एसपी बीजापुर कमलोचन कश्यप की उपस्थिति में सिलंगेर में डटे ग्रामीणों के प्रतिनिधियों के साथ प्रशासन की वार्ता रविवार को हूई। सर्व आदीवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर एवं गोंडवाना समाज के बीजापुर अध्यक्ष तेलम बौरैया के नेतृत्व में घायल ग्रामीण एवं मृतकों के परिजन बासागुड़ा पहुंचकर ग्रामीणों ने पहले अपनी बातें अधिकारियों को बताई और पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए ग्रामीणों के प्रतिनिधियों ने बस्तर संभागायुक्त जीआर. चुरेंद्र को ज्ञापन सौंपा, जिसमें गोलीबारी में शामिल दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सिलंगेर से कैम्प हटाने की मांग की गई। सुकमा कलेक्टर विनीत नंदनवार ने रविवार को बासागुड़ा में वार्ता के दौरान ग्रामीणों को बताया कि सिलंगेर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उन्होंने दण्डाधिकारी जांच के आदेशकर दिया है। कोंटा एसडीएम जल्द ही पूरे मामले की जांच करेंगे। ग्रामीणों से अपील की गई है कि ग्रामीण भी जांच में सहयोग करें और स्वतंत्र रूप से अपनी बातें जांच में रखें। साथ ही कलेक्टर एवं अन्य अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपने घर लौट जाने की अपील भी किया। सुकमा कलेक्टर विनीत नंदनवार ने ग्रामीणों से चर्चा करते हुए कहा कि सिलंगेर में जल्द ही स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण शुरू करवा दिया जाएगा। शासकीय राशन की दुकान भी सिलंगेर भेजी जाएगी, ग्रामीणों की जो भी समस्या होगी उसका निराकरण करवाया जाएगा। वहीं जो राज्य या केंद्र सरकार के स्तर की बातें होंगी, वहां तक पहुंचाई जाएगी। कलेक्टर ने ग्रामीणों से सिलंगेर से अपने-अपने घर वापस लौटने की अपील करने के साथ ही कोविड के संक्रमण के खतरे की जानकारी दिया। बैठक में अधिकारियों के ग्रामीणों के वापस लौटने की अपील के बाद ग्रामीणों ने कहा कि सिलंगेर से आंदोलन खत्म करने का निर्णय वे नहीं ले सकते। अधिकारियों से जो भी बात हुई है, उसकी जानकारी वे सिलंगेर में मौजूद सभी ग्रामीणों तक पहुंचाएगें, इसके बाद सभी को मिलकर इस पर निर्णय लेना है। मृतकों के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन द्वारा दिए गए पैसे भी वापस करने ग्रामीण अपने साथ लाए हुए थे, ग्रामीणों को अधिकारियों ने समझाया कि पैसे सिर्फ अंतिम संस्कार के लिए दिए गए हैं, जिसके बाद पैसे को ग्रामीण अपने पास रखने के लिये राजी हो गये। हिन्दुस्थान समाचार/राकेश पांडे




