नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है और शिव-शक्ति के पावन मिलन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन कई शुभ और सिद्ध योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे पूजा-पाठ और उपायों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
शिव आराधना से दूर होते हैं संकट
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, जल, दूध और भस्म अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट, रोग, भय और बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से महिलाएं इस दिन सुख-सौभाग्य और अखंड सुहाग की कामना करती हैं, जबकि युवा करियर और व्यापार में उन्नति के लिए शिव कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
व्यापार और करियर में उन्नति का विशेष उपाय
अगर आपके व्यापार में रुकावट आ रही है या नौकरी में तरक्की नहीं मिल पा रही है, तो महाशिवरात्रि की रात धतूरे का यह विशेष उपाय अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। इसके लिए महाशिवरात्रि की रात किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर एक धतूरा अर्पित करें। इसके बाद मंदिर के बाहर कम से कम 30 मिनट तक प्रतीक्षा करें और इस दौरान “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” मंत्र का निरंतर जाप करें।
लक्ष्मी वास के लिए करें ये उपाय
आधे घंटे बाद उसी धतूरे को उठाकर लाल कपड़े में बांध लें। इसके बाद उसे अपनी दुकान, ऑफिस या व्यापार स्थल के किसी सुरक्षित स्थान पर रख दें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और व्यापार में लाभ, धन आगमन और स्थिरता के योग बनने लगते हैं।
धतूरा उपाय करने का सही समय
इस उपाय को करने का सबसे उत्तम समय रात 12 बजे से 12:30 बजे के बीच माना गया है। धतूरे को शिवलिंग पर अर्पित करने के बाद आप इसे रात 12:30 बजे से सुबह 4 बजे तक किसी भी समय अपनी दुकान या कार्यस्थल पर बांध सकते हैं। यह उपाय केवल महाशिवरात्रि ही नहीं, बल्कि मासिक शिवरात्रि पर भी किया जा सकता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग और निशिता काल का महत्व
वर्ष 2026 की महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो लगभग 12 घंटे से अधिक समय तक रहेगा। यह योग सुबह 7 बजे से शाम 7:48 बजे तक प्रभावी रहेगा। वहीं, महाशिवरात्रि का निशिता काल रात 11:52 बजे से 12:42 बजे तक रहेगा, जिसे शिव पूजा और जलाभिषेक के लिए सबसे फलदायी समय माना गया है।





