नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। (Jagannath Rath Yatra 2023)आज जगन्नाथ पुरी सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली गई है। कहते हैं कि भगवान जगन्नाथ हर साल आषाढ़ मास की शुक्ल द्वितीया तिथि को तीर्थ यात्रा करते हैं। उस दिन भगवान जगन्नाथ विशाल रथों पर बैठकर गुंडिचा मंदिर जाएंगे, जहां वे कुछ दिन विश्राम करेंगे। भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भी अलग-अलग रथों में शहर में घूमेंगे। परंपरा के अनुसार, आज भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। वहां उनका स्वागत किया जाता है और तीनों भाई – बहन अपनी मौसी के घर कुछ दिनों के लिए आराम करते हैं। इसके बाद वह घर लौट आते हैं।
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कैसे शुरू हुई यात्रा
जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, देवी सुभद्रा ने एक बार अपने भाइयों श्री कृष्ण और बलराम से द्वारका जाने की इच्छा व्यक्त की, जिसके बाद तीनों ने रथ से द्वारका शहर का भ्रमण किया, उसके बाद से हर साल रथ यात्रा निकाली जाती हैा
क्या है रथ की खासियत
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हर साल, भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा ओडिशा शहर में आयोजित की जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी और देवी सुभद्रा तीन विशाल भव्य रथों पर विराजमान होते हैं। आगे बलराम जी का रथ, बीच में बहन सुभद्रा जी और पीछे भगवान जगन्नाथ जी का रथ चलता है।
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रथ यात्रा में, रथ को पवित्र नीम की लकडियों से बनाया जाता है जिन्हें देवदारू कहा जाता है इसमें किसी भी प्रकार के कील का प्रयोग नहीं किया जाता है। इस प्रकार रथ को शुद्ध रखा जाता है। शास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि किसी भी आध्यात्मिक कार्य में कील या कांटों का प्रयोग अशुभ होता है।
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भगवान बलराम के रथ का रंग लाल होता है। देवी सुभद्रा काले या लाल रंग के रथ पर विराजमान होती हैं और बाद में भगवान जगन्नाथ लाल या पीले रंग के रथ पर विराजमान होते हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ 44.2 फीट ऊंचा है, बड़े भाई बलभद्र का रथ 43.2 फीट ऊंचा है और सबसे छोटा रथ छोटी बहन सुभद्रा, 42.3 फीट ऊंचा होता है है।





