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Saturday, April 11, 2026
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हर्षा रिछारिया ने छोड़ा धर्म का रास्ता, महाकुंभ फेम इंफ्लुएंसर बोलीं-मैं सीता नहीं हूं जो अग्नि परीक्षा दूं…

महाकुंभ 2025 में चर्चित हर्षा रिछारिया ने धर्म की राह छोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, मैं मां सीता नहीं हूं जो अग्नि परीक्षा दूं और अब अपने पुराने काम में लौटूंगी।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान अचानक चर्चा में आईं सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने अब धर्म की राह छोड़ने का ऐलान कर दिया है। एक भावुक वीडियो के ज़रिए हर्षा ने बताया कि बीते एक साल में उन्हें लगातार विरोध, मानसिक दबाव और चरित्र हनन का सामना करना पड़ा, जिसने उनके मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया।

हर्षा रिछारिया ने आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संकल्प लिया था

महाकुंभ के दौरान हर्षा रिछारिया ने आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संकल्प लिया था। उनका कहना है कि वे पूरी निष्ठा के साथ धर्म के रास्ते पर चलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन हर कदम पर उन्हें रोका गया। हर्षा ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि महाकुंभ के बाद विरोध थम जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

”मुझ पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं”

इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में हर्षा ने कहा, मैं कोई गलत काम नहीं कर रही थी, न चोरी, न अपराध। मैं सिर्फ धर्म के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहती थी, लेकिन हर बार मुझे रोका गया। हर्षा ने यह भी साफ किया कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने यह धारणा बना दी कि उन्होंने महाकुंभ के नाम पर करोड़ों रुपये कमा लिए, जबकि हकीकत इसके उलट है।आज मैं उधारी में हूं। धर्म की राह पर आने से पहले मैं एक एंकर थी, अच्छा कमा रही थी, खुश थी। सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए हर्षा ने कहा कि जब कोई उनके मनोबल को नहीं तोड़ सका, तो उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए। हर्षा ने भावुक अंदाज़ में कहा,एक लड़की को तोड़ने का सबसे आसान तरीका उसका चरित्र हनन करना होता है। 

”मैं मां सीता नहीं हूं”

अपने बयान में उन्होंने धार्मिक प्रतीकों का ज़िक्र करते हुए कहा, आप अपना धर्म अपने पास रखिए। मैं मां सीता नहीं हूं जो बार-बार अग्नि परीक्षा दूं। जो परीक्षा मुझे देनी थी, वो मैं दे चुकी हूं। इसी के साथ हर्षा रिछारिया ने ऐलान किया कि, वे माघ मेले की मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद वे अपने आध्यात्मिक संकल्प को विराम देंगी और अपने पुराने पेशे में वापस लौटेंगी।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आने के बाद हर्षा के समर्थकों और आलोचकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। एक वर्ग उनके फैसले को आत्मसम्मान से जुड़ा कदम बता रहा है, तो वहीं दूसरा वर्ग इसे धर्म से पीछे हटना मान रहा है।महाकुंभ से उभरी यह कहानी अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां आस्था, समाज और महिला सम्मान पर नए सवाल खड़े हो रहे हैं।

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