नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । नरसिंह जयंती का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह भगवान विष्णु के शक्तिशाली और उग्र अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित होता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत और सच्चे भक्त की रक्षा के प्रतीक के रूप में श्रद्धा से मनाया जाता है। इस साल नरसिंह जयंती रविवार, 11 मई को मनाई जाएगी। यह तिथि हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को आती है। आइए जानते हैं इस पावन अवसर की तिथि और पूजा से जुड़ी प्रमुख जानकारी।
नरसिंह जयंती कब है?
पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 10 मई 2025 को शाम 5 बजकर 29 मिनट पर होगी और यह तिथि 11 मई की रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। इस स्थिति में, उदया तिथि को मान्यता मिलने के कारण नरसिंह जयंती का पर्व 11 मई, रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।
नरसिंह जयंती : पूजा विधि
नरसिंह जयंती के दिन विशेष श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को भगवान विष्णु के उग्र स्वरूप की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन की पूजा विधि इस प्रकार है :-
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें। एक वेदी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि नरसिंह जी की प्रतिमा उपलब्ध न हो, तो भगवान विष्णु का चित्र भी स्थापित किया जा सकता है।
पूजा शुरू करने से पूर्व व्रत और संकल्प लें। भगवान नरसिंह की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं। चंदन, कुमकुम, हल्दी और गुलाल आदि से उन्हें भक्ति भाव से अर्पण करें। भगवान को लाल या पीले वस्त्र पहनाएं और पीले फूलों की माला अर्पित करें। भोग में फल, मिठाई, खासतौर पर गुड़ और चने का अर्पण करें। तुलसी दल का प्रयोग अवश्य करें, यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। घी का दीपक जलाएं और भगवान नरसिंह के मंत्रों का जाप करें। अंत में आरती करें और पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें। अपनी क्षमतानुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
नरसिंह जयंती : पूजा मंत्र
भगवान नरसिंह की आराधना में निम्न मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना गया है। ये मंत्र भक्तों को भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करते हैं :-
बीज मंत्र –
ॐ क्रोध नरसिंहाय नृम नम:
ध्यान मंत्र –
ध्याये न्नृसिंहं तरुणार्कनेत्रं सिताम्बुजातं ज्वलिताग्रिवक्त्रम्।
अनादिमध्यान्तमजं पुराणं परात्परेशं जगतां निधानम्।।
नरसिंह स्तुति मंत्र-
ॐ उग्रवीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
अन्य ख़बरों के लिए क्लिक करें –www.raftaar.in
डिसक्लेमर
इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है,और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी





