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Monday, March 16, 2026
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Chhath Puja 2025 : कब से शुरू होगा छठ पूजा पर्व? जानिए नहाय-खाय से सूर्योदय अर्घ्य तक तिथि और शुभ मुहूर्त

हिन्‍दू धर्म में छठ पूजा का खास महत्‍व है। यह त्योहार बिहार समेत पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। चलिए जानते हैं कि इस बार छठ पूजा कब से शुरू होगी।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । दिवाली के तुरंत बाद आने वाला छठ पूजा का पर्व पूरे देश, खासकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान घरों से लेकर घाटों तक विशेष सजावट और भक्तिमय माहौल देखने को मिलता है।

छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है, जिसे ‘नहाय-खाय’ कहा जाता है। इसके बाद क्रमशः लोहंडा (खरना), संध्या अर्घ्य और फिर सूर्योदय अर्घ्य के साथ यह पर्व सप्तमी तिथि को समाप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया की पूजा और निर्जला व्रत करने से संतान को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस पर्व में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का विशेष महत्व है।

नहाय खाय 2025 की तारीख

छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय से होती है, जो कि कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। साल 2025 में नहाय खाय 25 अक्टूबर (शनिवार) को पड़ेगा। इस दिन व्रती पवित्र स्नान करने के बाद कुल देवी और सूर्य देव की पूजा करते हैं। पारंपरिक रूप से चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी का सेवन किया जाता है। 

कब है खरना 2025? 

नहाय खाय के अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना का पर्व मनाया जाता है। साल 2025 में खरना 26 अक्टूबर (रविवार) को पड़ेगा। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को स्नान के बाद छठी मैया की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। खरना पर गुड़ और चावल से बनी खीर, रोटी और शुद्ध घी से तैयार प्रसाद छठी मैया को अर्पित किया जाता है। खरना पूजा करने के बाद छठ व्रत की शुरूआत होती है।

कब देते हैं सूर्य को अर्घ्य?

कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है। इसके अगले दिन, यानी सप्तमी तिथि को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसी के साथ छठ व्रत का पारण किया जाता है और यह पावन पर्व संपन्न होता है।

छठ पूजा की तारीख और शुभ मुहूर्त – 

छठ पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष, 27 अक्टूबर को सुबह 06:04 बजे से षष्ठी तिथि की शुरुआत होगी। यह तिथि 28 अक्टूबर को सुबह 07:59 बजे तक चलेगी। इस हिसाब से, 27 अक्टूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, जबकि 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण होगा।

सूर्यास्त और सूर्योदय का समय –

27 अक्टूबर को सूर्यास्त शाम 05:40 बजे होगा।

28 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 06:30 बजे होगा।

अस्वीकरण : इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। हम इस लेख में लिखी बातों का समर्थन या पुष्टि नहीं करते हैं। 

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