नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। हिन्दू धर्म में अक्षय तृतीया काफी ज्यादा खास माना जाता है। इस विशेष अवसर पर कोई भी शुभ कार्य बिना किसी विशेष मुहूर्त के किया जा सकता है। इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन को लेकर कई विशेष बातें भी है जो आपको पता होना चाहिए। ऐसा कहा जाता है की शादी – विवाह के लिए ये दिन शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर अक्षय तृतीया शादी के लिए शुभ मुहूर्त क्यों है।
अक्षय तृतीया का महत्त्व
शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ था। ये वो दिन था जब भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया और अधर्म का अंत कर धर्म की स्थापना की। इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल अनंत काल तक प्रभावी रहता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। इसीलिए यह दिन प्रेम, पुनःप्राप्ति और एकजुटता का प्रतीक भी बन गया है।
अबूझ मुहूर्त का महत्त्व
अक्षय तृतीया वो दिन है जिसके लिए कोई विशेष मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती। इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। ये ऐसा समय होता है जिसमें बिना किसी गणना के भी सभी कार्य स्वाभाविक रूप से शुभ और सफल होते हैं। आज के विवाह करने वाले जोड़ी के जीवन में सौभाग्य, स्थायित्व और प्रेम बना रहता है। और उनके घर में भी देवी देवताओं का वाश होता है।
अक्षय तृतीया का जो जातक भगवान विष्णु, कुबेर भगवान और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करके उनकी कृपा प्राप्त करते है।ऐसा करने से आपके घर में हमेशा बरकत नहीं होती है। इस दिन सोना खरीदने का भी महत्त्व है। आपको बता दे की इस साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल 2025 को शाम 5:31 बजे से प्रारंभ होकर 30 अप्रैल 2025 को दोपहर 2:12 बजे समाप्त होगी। इसलिए अक्षय तृतीया का पूजन 30 अप्रैल को किया जाएगा।




