नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। कामदा एकादशी (Ekadashi) का व्रत 29 मार्च यानि कल रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने करनी चाहिए। कामदा एकादशी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली एकादशी के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन व्रत रखने और विष्णु जी की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। आपको बता दें की साल भर में कुल 24 एकादशियां आती है। अब सवाल ये उठना हैं कि आखिर एकादशी की शुरूआत कैसे हुई और इसका व्रत क्यों करना चाहिए तो चलिए जानते हैं इसकी कथा।
एकादशी का महत्त्व
हिंदू धर्म में एकादशी का एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो हर महीने चंद्रमा की अवस्था के अनुसार एक बार आता है। इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना और पापों से मुक्ति पाने के लिए मनाया जाता है। एकादशी का व्रत स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन उपवास रखने और भगवान विष्णु की भक्ति करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
एकादशी की कथा
पुराणों में एकादशी व्रत से जुड़ी कई कथाएँ बताई गई हैं। सबसे प्रसिद्ध कथा नारद मुनि से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय विष्णु भगवान ने एकादशी व्रत का महत्व बताया था। नारद मुनि ने यह जानने के लिए भगवान विष्णु से पूछा कि कौन-सा व्रत सबसे श्रेष्ठ है। तब भगवान विष्णु ने बताया कि एकादशी व्रत सबसे बड़ा पुण्यदायक व्रत है, जो पापों को नष्ट कर आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
राजा हरिश्चंद्र की कथा
शास्त्रों के अनुसार एक अन्य कथा में राजा हरिश्चंद्र की कथा भी प्रसिद्ध है। राजा हरिश्चंद्र ने एकादशी व्रत रखा और उसके पालन से उनका राज्य और परिवार खुशहाल हुआ। इस कथा से यह सिखने को मिलता है कि एकादशी व्रत करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
एकादशी व्रत के नियम
पुराण में एकादशी व्रत के महत्व के बारे में बताया गया है। एकादशी व्रत करने का नियम कठोर होता है। व्रत करने वाले को एकादशी तिथि के पहले यानी दशमी तिथि को सूर्यास्त से लेकर एकादशी के अगले दिन सूर्योदय तक व्रत रखना होता है।
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान एवं पूजा करें। पूरे दिन व्रत रहकर फलाहार या निर्जल उपवास किया जाता है। रात को कथा सुनना और भजन-कीर्तन करना भी शुभ माना जाता है।




