back to top
21.1 C
New Delhi
Thursday, April 9, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

करवा चौथ व्रत कथा- Karwa Chauth Vrat Katha in Hindi

करवा चौथ के दिन व्रत कथा पढ़ना अनिवार्य माना गया है। करवा चौथ की कई कथाएं है लेकिन सबका मूल एक ही है। करवा चौथ 2022 का व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा। करवा चौथ की एक प्रचलित कथा (Karwa Chauth Katha) निम्न है:

करवा चौथ व्रत कथा (Karwa Chauth Vrat Katha in Hindi)

महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ व्रत की कथा (Karwa Chautha Vrat Katha) कुछ इस प्रकार है- एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।

साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया। साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया।

इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है। 

Advertisementspot_img

Also Read:

spot_img

Latest Stories

अब राशन की दुकान से भी बन जाएगा Ayushman Card, जानें ऑनलाइन और ऑफलाइन आसान तरीका

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के...

Fulbright Nehru Masters Fellowship: अमेरिका में पढ़ाई का सुनहरा मौका, फीस से लेकर फ्लाइट तक सब फ्री

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। विदेश में पढ़ाई करना हर छात्र...

CSK को बड़ा झटका! अगले मैच में MS Dhoni के खेलने पर सस्पेंस

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। IPL 2026 के बीच Chennai Super...

मौसम के बदलाव से बिगड़ सकती है सेहत, इन बातों का रखें खास ध्यान

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मौसम में काफी बदलाव देखने...

Exit Poll पर सख्ती: 9 से 29 अप्रैल तक बैन, नियम तोड़ने पर 2 साल की जेल और देना होगा जुर्माना

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देश में चल रहे विधानसभा चुनावों...

Iran-US Ceasefire: ईरान और अमेरिका के बीच हुआ युद्ध विराम, अब इस चीजों के दाम गिरने तय

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। ईरान और अमेरिका के बीच हालिया...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵