नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। ज्येष्ठ माह की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। सदियों से इस दिन पितरों के तर्पण करने का विधान माना जाता रहा है। लेकिन इस दिन पितरों के तर्पण काखास महत्व इसलिए है क्योंकि, एक पौराणिक कथा के अनुसार, भागीरथ के वर्षों कठिन तपस्या के बाद इस दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थी। लेकिन भागीरथ के गंगा को पृथ्वी पर बुलाने ये खास कारण था। जो इस प्रकार है आइए जानते है इस खास दिन के बारे में।
गंगा दशहरा को पितरों के तर्पण के लिए बहुत ही खास दिन माना जाता है, कहते है इस दिन पितरों के तर्पण करने से उन्हें मुक्ति और शांति मिलती है। क्योंकि, भागीरथ ने यह दिन पितरों के तर्पण के लिए वर्षों कठिन तपस्या के बाद गंगा को पृथ्वी पर उतारा था। अगर आप भी अपने पितरों को मुक्ति मिलने तर्पण करना चाहते है तो ये आर्टिकल आपके लिए बेहद यूजफूल साबित हो सकता है।
जाने पितृ दोष से कैसे मिलेगी मुक्ति
अगर किसी की कुंडली में पितृ दोष है तो ये दिन पितृ दोष की शांति के लिए बढ़िया दिन है, इस दिन आप गंगा नदी में विधि विधान से पितरों का तर्पण करके अपने पितृ दोष को शांत कर सकते है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन आपके पितरों को तर्पण से जन्म मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है । पितरों के तर्पण से वो वो प्रसन्न होकर आपको सुख शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते है।
इस दिन कैसे करें पितरों को प्रसन्न?
गंगा दशहरा के दिन आप गंगा में पितरों के निमित जल में तिल, जौ, अक्षत मिलाकर तर्पण कर सकते हैं।
गंगा दशहरा के दिन उनके नाम से आप दीपदान कर सकते हैं घर के दक्षिण दिशा में दीप जला सकते हैं.
इस दिन पितरों के निमित्त दान पुण्य का विधान है, पितरों के नाम अन्न, जल का दान कर सकते हैं।
इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है,आप पितरों के नाम पर मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
इस दिन आप पशु और पक्षियों को अन्न और जल दान करके भी पितरों को खुश कर सकते है।
इस दिन आप अपने पितरों के नाम पर पीपल के निमित्त सांयकाल एक दीपक जला सकते है।
इन समस्त उपायों को करने से अपने पितृ दोष से आप मुक्ति पा सकते है, साथ ही अपने पितरों को प्रसन्न कर सकते है।




