नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। शारदीय नवरात्रि 2025 का पर्व इस बार खास संयोगों में आ रहा है। अष्टमी (29,30 सितंबर ) और नवमी (1 अक्टूबर) है। इस दिन नौ कन्याओं और एक बालक (लांगूर) को देवी के रूप में पूजकर भोजन कराया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि बिना कन्या पूजन के नवरात्रि का व्रत अधूरा माना जाता है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि पूजन से लेकर विदाई तक कुछ नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। छोटी-सी लापरवाही भी मां दुर्गा की नाराजगी का कारण बन सकती है।
कन्या पूजन में थाली कैसी होनी चाहिए? जानें जरूरी भोग
1. सूजी का हलवा
शुद्ध देसी घी में बना हलवा कन्या पूजन का सबसे मुख्य प्रसाद होता है। इसे सबसे पहले मां दुर्गा को अर्पित करें।
2. पूरी
गेहूं के आटे से बनी फूली हुई, गरम-गरम और सादी पूरियां बनाएं। कुछ स्थानों पर मीठी पूड़ी की परंपरा भी है।
3. काले चने
बिना प्याज-लहसुन के उबले और हल्के मसालों में बने काले चने पूजा की थाली में ज़रूर रखें। यह मां को अति प्रिय माने जाते हैं।
4. खीर
अगर हलवे की जगह या साथ में खीर बनाना चाहें तो चावल, दूध और घी से बनी खीर भी उत्तम मानी जाती है।
5. ताजे फल और मिठाई’
भोजन के बाद कन्याओं को मौसमी फल जैसे केला, सेब और घर की बनी मिठाई (जैसे लड्डू या बर्फी) ज़रूर दें।
भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें वरना हो सकती है अनिष्ट
प्याज और लहसुन
मांस, मछली और अंडा
बासी या रात का बचा हुआ खाना
होटल या बाजार की बनी मिठाइयां और पैक्ड स्नैक्स
खट्टी चीजें जैसे इमली, नींबू या खट्टी चटनी
कन्याओं को ऐसे करें विदा, तभी होगा पूजन पूर्ण
भोजन के बाद कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें।
उन्हें उपहार (जैसे टिफिन, किताब, कपड़े, स्टेशनरी, नकद आदि) देकर सम्मानपूर्वक विदा करें।
विदा के तुरंत बाद झाड़ू-पोंछा न लगाएं, यह पूजा की ऊर्जा को अपवित्र कर सकता है।
संस्कारों के साथ निभाएं परंपरा दें इको-फ्रेंडली उपहार
अगर इस बार आप कुछ अलग करना चाहते हैं, तो कन्याओं को इको-फ्रेंडली उपहार दें, जैसे स्टील की बोतलें, कपड़े की थैलियां, या उपयोगी किताबें। इससे धार्मिक परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण और अच्छे संस्कारों का संदेश भी जाएगा।




