नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पवित्र अवधि में लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। माना जाता है कि इन कर्मों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत इस वर्ष 7 सितंबर से हो चुकी है और इसका समापन 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। इस लेख में हम जानेंगे कि दिवंगत माताओं का श्राद्ध किस दिन किया जाएगा, साथ ही तर्पण के नियम और समय से जुड़ी अहम जानकारी भी साझा करेंगे।
कब है मातृ नवमी का श्राद्ध? जानें तिथि और तर्पण के शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2025 में मातृ नवमी का श्राद्ध 15 सितंबर, दिन सोमवार को किया जाएगा। इस दिन दिवंगत माताओं की स्मृति में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म किए जाते हैं। इस अवसर पर शुभ मुहूर्त में श्राद्ध और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
श्राद्ध के शुभ मुहूर्त (15 सितंबर 2025, सोमवार)
कुतुप मुहूर्त : सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक
रौहिण मुहूर्त : दोपहर 12:41 बजे से 01:30 बजे तक
अपराह्न काल : दोपहर 01:30 बजे से 03:58 बजे तक
जानें मातृ नवमी का धार्मिक महत्व
पितृ पक्ष के दौरान मातृ नवमी का दिन दिवंगत माताओं की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए श्राद्ध कर्म करने के लिए उपयुक्त होती है, जिनकी मृत्यु नवमी तिथि को हुई हो, चाहे किसी भी माह में या फिर जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो । इस दिन विधिपूर्वक किया गया श्राद्ध और तर्पण न केवल मृत माताओं को शांति प्रदान करता है, बल्कि परिवार पर भी उनका आशीर्वाद बना रहता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कर्म से दिवंगत स्त्रियों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनके दोष शांत हो जाते हैं।
मातृ श्राद्ध 2025: जानें दिवंगत माताओं के श्राद्ध करने के नियम और विधि
मातृ नवमी के दिन दिवंगत माताओं की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। नीचे दिए गए नियमों का पालन करके आप सही विधि से मातृ श्राद्ध कर सकते हैं:
श्राद्ध करने की विधि और नियम
स्नान व स्वच्छता : सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ, धुले हुए वस्त्र धारण करें।
तर्पण करें : कुश, जौ, काले तिल और जल की सहायता से पवित्र भावना से तर्पण करें।
पिंडदान करें : चावल, जौ और काले तिल को मिलाकर पिंड बनाएं और उन्हें दिवंगत माताओं को अर्पित करें।
श्राद्ध भोजन तैयार करें : घर में सात्विक भोजन बनाएं, जिसमें खीर, पूरी, सब्जी, दाल आदि शामिल हों।
पहले करें अर्पण : इस भोजन का पहला भाग कौवे, गाय, कुत्ते और देवताओं के लिए अलग निकालें। ये पितृपक्ष के प्रतीक माने जाते हैं।
पितरों को अर्पण : पिंड और भोजन को विधिपूर्वक पितरों को अर्पित करें।
ब्राह्मण भोज और दक्षिणा : शास्त्रों के अनुसार, ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथासंभव दक्षिणा दें।
दान करें : श्राद्ध के उपरांत गरीबों व जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करें।
Disclaimer : इस लेख में उपाय, लाभ और सुझाव केवल सामान्य जानकारी व धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसका समर्थन नहीं करते हैं और न ही इनकी प्रमाणिकता का दावा करते हैं।




