नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारत के उपराष्ट्रपति पद का चुनाव 9 सितंबर को होगा। इस बार एनडीए ने सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, जो फिलहाल महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। वहीं, इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है।
क्रॉस वोटिंग का दावा दोनों ओर से
चुनाव से पहले एनडीए और इंडिया ब्लॉक दोनों ही गुटों की तरफ से क्रॉस वोटिंग के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, इस चुनाव में राजनीतिक दल व्हिप जारी नहीं कर सकते, इसलिए सांसद अपने विवेक से वोट डाल सकते हैं। भारत के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा चुनावों में व्हिप जारी नहीं किया जा सकता। क्योंकि ये चुनाव संसद से नहीं बल्कि चुनाव आयोग की देखरेख में होते हैं, उपराष्ट्रपति का चुनाव गुप्त मतदान (सीक्रेट बैलेट) से होता है। सांसदों को बैलेट पेपर पर वोट डालना होता है। वोट बॉक्स में पर्ची डाली जाती है, न कि ईवीएम से मतदान पूरी तरह गोपनीय होता है, यानी कोई भी यह नहीं जान पाता कि किसने किसे वोट दिया।
कितने सांसद डालेंगे वोट?
लोकसभा और राज्यसभा के कुल 782 सदस्य वोट डाल सकते हैं। फिलहाल 6 सीटें खाली हैं, यानी 776 सांसद वोट देंगे। किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 349 वोटों की जरूरत होगी। अनुमानित समर्थन एनडीए- करीब 422 वोट है तो इंडिया ब्लॉक के पास करीब 354 वोट है। बागी सांसदों पर भी होगी कार्रवाई चूंकि इस चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता, इसलिए कोई विधायी कार्रवाई संभव नहीं है। लेकिन राजनीतिक दल अपनी आंतरिक कार्रवाई जरूर करते हैं, जैसे पार्टी से निष्कासन अगले चुनाव में टिकट न देना पार्टी पदों से हटाना यह कार्रवाई राजनीतिक फैसला होती है, कानूनी नहीं। पहले भी हुई है क्रॉस वोटिंग 2017 एम. वेंकैया नायडू को कांग्रेस और विपक्ष के कई सांसदों की क्रॉस वोटिंग से फायदा हुआ। नतीजतन वे आसानी से जीत गए। कांग्रेस ने बाद में कई बागी सांसदों को पार्टी से निकाला। 2012 ममता बनर्जी उम्मीदवार थीं, लेकिन उनकी पार्टी के कुछ सांसदों ने ही क्रॉस वोटिंग की। नतीजा हामिद अंसारी बड़े अंतर से जीत गए। 2007 तब भी कुछ क्रॉस वोटिंग हुई थी, लेकिन असर बहुत बड़ा नहीं पड़ा। हामिद अंसारी विजयी हुए। उपराष्ट्रपति चुनाव पूरी तरह सांसदों के विवेक पर आधारित होता है। इसलिए हर बार क्रॉस वोटिंग की आशंका बनी रहती है। इस बार भी मुकाबला दिलचस्प है, लेकिन संख्याबल के हिसाब से एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन का पलड़ा भारी माना जा रहा है।




