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Pitru Paksha 2025: जगन्नाथ पुरी में पिंडदान का है खास महत्व, पितरों के लिए ‘मुक्ति’ का सबसे बड़ा केंद्र

जगन्नाथ पुरी वह स्थान है जहां श्रद्धा केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मुक्ति का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती है। यहां पिंडदान करने से आत्मा को शांति और मोक्ष मिलने की मान्यता है।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । सनातन परंपरा में पितृ पक्ष को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस अवधि में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति सुनिश्चित करना होता है।

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान किया गया हर कर्म सीधे पितरों तक पहुंचता है और परिवार को भी पुण्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि भारत के साथ-साथ विदेशों में बसे हिंदू भी इस पवित्र श्राद्ध पक्ष का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

पितृ पक्ष 7 सितंबर से आरंभ होकर 21 सितंबर तक चलेगा। इस पवित्र अवधि में देशभर के लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पवित्र स्थलों की ओर रुख करते हैं। ओडिशा का जगन्नाथ पुरी इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख केंद्र बन जाता है।

पिंडदान के लिए एक प्रमुख केंद्र है पुरी 

जगन्नाथ पुरी पिंडदान के लिए एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह स्थल अपने भव्य मंदिर और वार्षिक रथयात्रा के लिए तो प्रसिद्ध है, साथ ही इसे पितरों की आत्मा को मोक्ष प्रदान करने वाली पवित्र भूमि के रूप में भी जाना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।

क्यों पुरी को पिंडदान माना जाता है अच्छा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुरी का पवित्र संबंध भार्गवी नदी से है, जो पुरी के पास बहती है। नदी और समुद्र के संगम का यह स्थल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि यहां पिंडदान करने से पितरों को शांति और मोक्ष प्राप्त होता है, जिससे वे जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाते हैं।

यहीं कारण है कि पितृ पक्ष के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालु पुरी पहुंचकर अपने पितरों का श्राद्ध अर्पित करते हैं। पुरी में पिंडदान का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह हिंदू धर्म के चार धामों में शामिल पवित्र स्थल है।

क्या होता है पिंडदान और क्यों है यह इतना खास?

पिंडदान केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि दिवंगत आत्मा को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने का माध्यम है। इसमें चावल, जौ का आटा, सूखा दूध, तिल और शहद से बने गोल पिंड अर्पित किए जाते हैं। एक पिंड सीधे दिवंगत के लिए होता है, बाकी पूर्वजों को समर्पित किए जाते हैं।

पिंडदान श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक 

पिंडदान ब्राह्मण पंडितों द्वारा पवित्र स्थलों पर संपन्न कराया जाता है और इसे हिंदू धर्म के प्रमुख अनुष्ठानों में गिना जाता है। इस माध्यम से जीवित व्यक्ति अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करता है, जिससे उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है। यह कर्मकांड नहीं, बल्कि श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।

विदेश में रहने वालों के लिए खास सुविधा 

आज कई भारतीय विदेश में रहते हैं और समय या परिस्थितियों के कारण अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान नहीं कर पाते। ऐसे लोगों के लिए पुरी में ऑनलाइन और प्रोफेशनल पिंडदान सेवाएं उपलब्ध हैं। अनुभवी ब्राह्मण पंडित शास्त्रों के अनुसार यह अनुष्ठान संपन्न करते है।

आकर्षक पर्यटन स्थल के लिए प्रसिद्ध है पुरी 

पुरी केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ही नहीं, बल्कि एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है। यहां के शांत समुद्र तट, प्राचीन स्मारक और स्थानीय व्यंजन पर्यटकों को लुभाते हैं। पुरी की यात्रा आध्यात्मिक शांति के साथ मानसिक सुकून भी देती है, और यह धर्म, इतिहास और प्रकृति का अनूठा संगम प्रस्तुत करती है।

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