नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी मनाई जाती है। मोहिनी एकादशी हिन्दू धर्म में एक अत्यंत शुभ और पुण्यदायी तिथि मानी जाती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार,भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पान कराया था। इस विशेष अवसर पर व्रत रखना और विधिवत पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि यदि इस दिन भगवान विष्णु को उनके प्रिय भोग अर्पित किए जाएं, तो भक्तों के जीवन में सौभाग्य, सुख और समृद्धि का आगमन होता है।
मोहिनी एकादशी तिथि
पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 7 मई 2025 को सुबह 10:19 बजे से होगी और इसका समापन 8 मई 2025 को दोपहर 12:29 बजे पर होगा। इसलिए उदया तिथि के अनुसार मोहिनी एकादशी का व्रत 8 मई 2025, गुरुवार को रखा जाएगा।
भगवान विष्णु को लगाएं ये शुभ भोग
मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन उन्हें प्रिय वस्तुओं का भोग अर्पित करने से न केवल ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। आइए जानते हैं वे प्रमुख वस्तुएं जिन्हें इस पावन दिन भगवान विष्णु को भोग स्वरूप अर्पित किया जाना चाहिए :-
तुलसी दल
भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है। किसी भी भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें। मान्यता है कि तुलसी के बिना श्रीहरि कोई भी अर्पण स्वीकार नहीं करते। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर घर में शुद्धता और आर्थिक समृद्धि लाता है।
पीला रंग
पीला रंग विष्णु भगवान को बहुत प्रिय है। इस दिन पीले रंग के फल जैसे केला, आम, या पीली मिठाइयों का भोग लगाना विशेष शुभ माना गया है। इसे अर्पित करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। पीला रंग समृद्धि, शुभता और पवित्रता का प्रतीक है।
माखन और मिश्री
बाल रूप में पूज्य भगवान विष्णु (बाल गोपाल) को माखन-मिश्री बहुत ही प्रिय है। मोहिनी एकादशी के दिन यह भोग लगाने से विष्णु जी की कृपा बरसती है, जिससे रिश्तों में मधुरता आती है और पारिवारिक प्रेम प्रगाढ़ होता है।
खीर
चावल, दूध और चीनी से बनी खीर भगवान विष्णु को प्रिय है। मोहिनी एकादशी पर इसका भोग लगाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में सामंजस्य बढ़ता है।
फल
मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु को मौसमी फल जैसे आम, केला, तरबूज या खरबूजा आदि अर्पित करना भी पुण्यदायी है। यह भोग जीवन में ताजगी, ऊर्जा और सकारात्मकता लाता है।
पंजीरी
धनिया और सूखे मेवों से बनी पंजीरी उत्तर भारत में विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसे भोग में शामिल करने से घर में अन्न-धन की वृद्धि होती है।
मोहिनी एकादशी पर भोग अर्पण का महत्व
मोहिनी एकादशी न केवल व्रत और पूजा का दिन है, बल्कि भगवान विष्णु को प्रिय भोग अर्पित कर उनकी कृपा पाने का एक शुभ अवसर भी है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति से किए गए भोग अर्पण से न केवल भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, बल्कि जीवन की बाधाएं और संकट भी दूर होते हैं। यह दिन आत्म-शुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वरीय अनुकंपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन भगवान विष्णु को प्रेमपूर्वक उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करते हैं, उन्हें सौभाग्य, स्वास्थ्य, और धन-वैभव का वरदान प्राप्त होता है।
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