नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। प्रयागराज का विश्व प्रसिद्ध माघ मेला इस वर्ष कुल 45 दिनों तक चलेगा। माघ मेले का दूसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण स्नान मकर संक्रांति के अवसर पर होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं। इसे देवताओं का काल माना गया है, इसलिए इस दिन किया गया गंगा स्नान हजारों यज्ञों के समान फल देने वाला माना जाता है। माघ मेले में मकर संक्रांति स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
एक करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार पौष पूर्णिमा के अवसर पर संगम में 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई थी। वहीं मकर संक्रांति के दिन करीब एक करोड़ श्रद्धालुओं के संगम पहुंचने का अनुमान है। इस वर्ष मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का संयोग भी बन रहा है, जिससे स्नान और दान का पुण्य और अधिक बढ़ जाता है।
मकर संक्रांति स्नान का शुभ मुहूर्त
धार्मिक पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति पर विशेष पुण्यकाल दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:20 बजे तक रहेगा। इस दौरान किया गया स्नान, दान और पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। वहीं ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का भी विशेष महत्व है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से 5:44 बजे तक रहेगा, जिसे ध्यान, जप और गंगा स्नान के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है।
क्यों खास है मकर संक्रांति का स्नान
मकर संक्रांति का स्नान केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है, मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। स्नान के साथ दान, पूजा और भजन-कीर्तन करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
माघ मेले के प्रमुख स्नान पर्व
माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा (3 जनवरी 2026) से होती है। इसके बाद मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026), माघी पूर्णिमा (17 जनवरी 2026) और अंत में महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) पर प्रमुख स्नान होते हैं। महाशिवरात्रि के दिन माघ मेले का समापन होता है और इस स्नान को मोक्षदायी माना गया है।
आस्था और आध्यात्म का महासंगम
माघ मेले में मकर संक्रांति का स्नान श्रद्धालुओं के लिए नए आरंभ, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। यही कारण है कि हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।





