नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । दिसंबर माह की शुरुआत के साथ ही मार्गशीर्ष पूर्णिमा का पावन पर्व दरवाज़े पर दस्तक दे चुका है। इसी शुभ तिथि पर हर वर्ष अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित है कि इसी दिन माता पार्वती ने जगत का पालन-पोषण करने के लिए अन्नपूर्णा देवी का रूप धारण किया था। माता अन्नपूर्णा को भोजन, समृद्धि और पोषण की देवी माना जाता है।
विश्वास है कि उनकी कृपा हो जाए तो जीवन में कभी अन्न-धन की कमी नहीं रहती। इसलिए इस पावन अवसर पर भक्त विशेष पूजा, दान और व्रत रखकर माता अन्नपूर्णा का आशीर्वाद पाते हैं। अगर आप भी इस बार अन्नपूर्णा जयंती पर घर में सुख-समृद्धि और अन्न-धन की बढ़ोतरी चाहते हैं, तो कुछ खास नियमों और बातों का पालन अवश्य करें।
रसोई में करें ये धार्मिक कार्य, मिलेगा माता की कृपा
हिंदू मान्यताओं के अनुसार रसोई घर को मां अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है। इसलिए इस दिन रसोई में सफाई, दीपक जलाना और देवी की प्रतिमा के सामने चावल, आटा और नैवेद्य चढ़ाना बेहद शुभ फलदायी माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
भोजन करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां-
थाली में उतना ही भोजन लें, जितना आप खा सकें।
प्लेट में जूठा खाना न छोड़ें।
दहलीज़ पर बैठकर भोजन करने से बचें-यह धार्मिक और वास्तु दोनों दृष्टि से अशुभ माना गया है।
माना जाता है कि इन गलतियों से घर में अन्न-धन की कमी, विवाद और आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
वास्तु नियम: रसोई में अग्नि और जल को न रखें पास-पास
वास्तु शास्त्र के अनुसार-
सिंक (जल तत्व) और गैस चूल्हा (अग्नि तत्व) को पास रखने से घर में वास्तु दोष उत्पन्न होता है। इन्हें हमेशा थोड़ी दूरी पर रखना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आर्थिक समृद्धि बढ़ती है।
मां अन्नपूर्णा को प्रसन्न करने का सिद्ध मंत्र-
“अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शंकरप्राणवल्लभे।
ज्ञान-वैराग्य-सिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति।।”
“माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः।
बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम्।।”
माना जाता है कि इन मंत्रों के जाप से घर में अन्न-समृद्धि, सौभाग्य और मानसिक शांति बढ़ती है।
अस्वीकरण:
इस लेख में बताए गए धार्मिक उपाय और मान्यताएं परंपराओं पर आधारित हैं। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपने विवेक और अनुभवी लोगों की सलाह अवश्य लें।





