नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन मां अहोई की पूजा कर महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करती हैं। साथ ही, इस दिन व्रत, पूजा और दान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि जो महिलाएं इस दिन श्रद्धा से व्रत रखती हैं और गरीबों को दान देती हैं, उनकी संतान से जुड़े सभी संकट दूर हो जाते हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा का समय: शाम 5:53 बजे से 7:08 बजे तक
तारों का दर्शन: 6:17 PM
चंद्र दर्शन: रात 11:20 बजे
महिलाएं तारों के दर्शन के बाद मां अहोई की पूजा करती हैं और संतान की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
अहोई अष्टमी पर दान का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन दान देने से जीवन के पाप भी कटते हैं और संतान की किस्मत प्रबल होती है। जानिए इस दिन दान करना बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन दान करने से संतान के जीवन से सभी दुख, तकलीफें और मुसीबतें दूर होती हैं. इस दिन आप जरूरतमंदों को भोजन करा सकते हैं, इसे बहुत शुभ माना जाता है।
क्या करें दान?
अनाज दान करें – चावल, गेहूं, दाल आदि का दान जरूरतमंदों को दें
वस्त्र दान करें – पुराने या नए वस्त्र निर्धनों को दान करें
धन का दान – जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता करें
फल और मिठाई – पूजा में अर्पित फल व मिष्ठान्न का दान करें
भोजन कराएं – किसी भूखे को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है
कहा जाता है कि अहोई अष्टमी का व्रत करने से न केवल संतान की आयु लंबी होती है, बल्कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि भी बनी रहती है। यह व्रत मातृ शक्ति के आशीर्वाद को प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम है।




