नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। 2 June 2024। हिंदू पंचांग के अनुसार सभी एकादशियों का अलग अलग महत्व होता है। एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है कहते हैं जो जातक अपरा एकादशी का व्रत रखता है और विष्णु भगवान की पूजा करने के साथ-साथ उनके मंत्रों का भी जाप करता है। उसके ऊपर भगवान की हमेशा कृपा बनी रहती है। वहीं, आज के दिन किया गया व्रत समस्त पापों से मुक्ति दिलाता है और जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
अपरा एकादशी का महत्व
शास्त्र के अनुसार व्यक्ति हर दिन कोई ना कोई जाने अनजाने में पाप कर देता है। जिसकी मुक्ति मिलन बहुत जरूरी होता है क्योंकि यह पाप अपने अनजाने में किया होता है। ऐसे में जो व्यक्ति अपरा एकादशी का व्रत रखता है उसके ऊपर से अनजाने में किए गए सभी पापों का दाग मिट जाता है। इसके कारण वह नरक का भागीदारी नहीं रहता और स्वर्ग के भागी बनता हैं। इसके अलावा आज के दिन गाय, सोना और जमीन आदि का भी दान देने से काफी ज्यादा पुण्य होता है।
पूजा विधि
अपरा एकादशी के दिन आप जल्दी सुबह उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद मंदिर जाएं और अगर घर पर ही आप पूजा कर रहे हैं तो एक लकड़ी की चौकी बनाएं और उसमें कपड़ा रख कर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। भगवान को चंदन का तिलक जरूर लगाएं। भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल अर्पित करें और साथ ही धूप, दीप चढ़ाएं। एकादशी की कथा का पाठ अवश्य करें क्योंकि इसके बिना व्रत व पूजा अधूरी मानी जाती है। पूजा करने के बाद आप सोना, चांदी और जमीन का दान भी कर सकते हैं।
इन मंत्रों का करें जाप
ॐ नारायणाय नम:।
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
ऊं नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
ओम नमो भगवते वासुदेवाय
ओम ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः
ओम भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ओम भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।
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