नई दिल्ली रफ्तार डेस्क।26 May 2024। हिंदू शास्त्र के अनुसार एकदंत संकष्टी चतुर्थी का काफी महत्व होता है। आज के दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना करके उन्हें दूर्वा लड्डू मोदक आदि का भोग लगाकर साथ ही मंत्रों का जाप करके प्रसन्न किया जाता है। कहते हैं आज के दिन काफी अच्छा योग बनता है इसी वजह से आप आज के दिन भगवान को प्रसन्न कर सकते हैं।
पूजा विधि
एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन आप भगवान की पूजा करने के लिए सुबह प्रातः काल उठे और स्नान करके भगवान की मंदिर के पास एक चौकी रखें। उसे पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान की मूर्ति की स्थापना करें। अगर आपके घर के मंदिर में भगवान पहले से ही है तो आप वही पर उनकी पूजा कर सकते हैं। पूजा करने के लिए आप अच्छा हल्दी दुर्वा का उपयोग करें और भगवान को भोग में बेसन अथवा मोदक के लड्डू चढ़ाएं।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी का महत्व
आज के दिन आपको भगवान गणेश की पूजा अर्चना करनी चाहिए। इसके साथ ही आपको आज दान भी देना चाहिए। दान देने से आपको भगवान की कृपा प्राप्त होती है और वह आपके सारे कष्ट हर लेते हैं। और आपके घर परिवार में सुख शांति और वृद्धि आती है।
इन मंत्रों का करें जाप
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभानिर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
ॐ श्रीम गम सौभाग्य गणपतये
वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि,तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा’
ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरु गणेश।
ग्लौम गणपति, ऋद्धि पति, सिद्धि पति. करो दूर क्लेश ।।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गण्पत्ये वर वरदे नमः
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात”
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।’
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये।
वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।
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