नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। भाई बहन के रिश्ते का प्रतीक त्यौहार रक्षाबंधन होता है। लेकिन भाई दूज का दिन भी बहुत खास माना जाता है। रक्षाबंधन के अलावा भाई दूज के दिन भी बहन और भाई एक दूसरे के साथ रहते हैं बहन भाई को चंदन लगाती हैं और मिठाई खिलाती हैं। यह त्यौहार भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।भाईदूज के दिन भाई को तिलक लगाने के दौरान मंत्रों का जाप विशेष रूप से करें। इससे शुभ परिणाम मिल सकते हैं और सुख-समृद्धि में भी वृद्धि हो सकती है।
पूजा विधि मुहूर्त
भाई को पूर्व या उत्तर की ओर बैठाएं। यह दिशा शुभ मानी जाती है।भाई के सिर पर साफ रुमाल या कपड़ा रखें।रोली और अक्षत (चावल) से तिलक करें। यह भाई की लंबी उम्र और सुरक्षा का प्रतीक है।भाई के हाथ में कलावा (मौली) बांधें।
भाई दूज का पर्व मनाने का मुहूर्त
भाई दूज का पर्व आज के दिन पूरा देश मना रहा है हालांकि आपको यह पर बनाने से पहले इसका सही मुहूर्त के बारे में पता होना चाहिए ताकि आप सही मुहूर्त पर पूजा कर सकें और अपने भाई को टीका लगा सके।तिलक का समय: दोपहर 01:13 बजे से 03:28 बजे तक अवधि: कुल 2 घंटे 15 मिनट
इन मंत्रों का करें जाप
गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़े फूले फलें।
“ॐ यमाय नमः”।
“ॐ स्वस्ति भद्राणि शुभानि, पूर्णं भवतु ते आयुष्मान्। दीर्घायु:।
भैया दूज वाले दिन आसन पर चावल के घोल से चौक बनाएं। इस चौक पर भाई को बिठाकर बहनें उनके हाथों की पूजा करती हैं। सबसे पहले बहन अपने भाई के हाथों पर चावलों का घोल लगाती है। उसके ऊपर सिंदूर लगाकर फूल, पान, सुपारी तथा मुद्रा रख कर धीरे-धीरे हाथों पर पानी छोड़ते हुए मंत्र बोलती है ‘गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को। सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।’
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