नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगे लालू यादव को मंगलवार सुबह होते ही करारा झटका लगा है। मंगलवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लैंड फॉर जॉब स्कैम मामले में सुनवाई शुरू हुई थी। भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले में कोर्ट ने लालू यादव, हेमा यादव और बेटे तेजप्रताप यादव के खिलाफ समन जारी किया है। इसके अलावा कोर्ट ने उन सभी आरोपियों को तलब किया है जो इस मामले में नामजद हैं। CBI ने लालू समेत 78 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसी आधार पर सभी आरोपियों को 11 मार्च को पेश होने का आदेश दिया गया है।
लालू की मुश्किल बढ़ा सकते हैं ये आरोप
इस पूरे मामले की टाइमलाइन शुरू होती है साल 2004 से। साल 2004 में लालू यादव UPA सरकार में रेल मंत्री थे। वह साल 2009 तक उस पद पर बने रहे। उनपर आरोप लगे कि उस समयावधि के दौरान उन्होंने नौकरी के बदले लोगों से जमीन ली और उस जमीन को अपने परिवार के लोगों के नाम कर दिया। आरोप है कि रेलवे मे अलग अलग पदों पर भर्ती करने की एवज में उन्होंने कौड़ी के भाव इच्छुक लोगों से जमीन ली और उसके बदले उन्हें मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नौकरी दी गई।
78 आरोपी जांच एजेंसियों के रडार पर
CBI और ED ने इस मामले की शुरुआती जांच शुरू की थी। जांच में तत्कलीन रेल मंत्री उनके परिवार के कुछ सदस्यों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। उनके परिवार और उनके कुछ करीबी लोगों पर धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया गया। CBI ने जैसे जैसे जांच के दायरे को बढ़ाया वैसे वैसे इसमें कई बड़े अफसर फंसते हुए चले गए। जिन 78 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, उनमें 30 बड़े सरकारी अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं. इसमें रेलवे के बड़े अफसर भी आरोपी बनाए गए हैं।





