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Tuesday, March 17, 2026
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Bihar Chunav: बिहार की सियासत के नए हॉट केक क्यों बन गए हैं प्रशांत किशोर और मुकेश सहनी? जानिए अंदर की कहानी

2025 के बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, राज्य की राजनीति में दो नाम लगातार सुर्खियों में हैं प्रशांत किशोर (PK) और मुकेश सहनी। जहां प्रशांत किशोर अपनी पोल खोल राजनीति से नेताओं की नींद उड़ा रहे हैं।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, राज्य की राजनीति में दो नाम लगातार सुर्खियों में हैं प्रशांत किशोर (PK) और मुकेश सहनी। जहां प्रशांत किशोर अपनी “पोल खोल राजनीति” से नेताओं की नींद उड़ा रहे हैं, वहीं मुकेश सहनी की सख्त शर्तों ने महागठबंधन को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है।

PK का मिशन: सभी पार्टियों की पोल खोलना

जन सुराज अभियान के संयोजक प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव को ‘नौवीं फेल’ कहकर उनकी काबिलियत पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताने तक का दावा कर डाला। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की 13 करोड़ जनता राम भरोसे है, और पिछले 35 सालों में लालू यादव, राबड़ी देवी और नीतीश कुमार के शासन ने राज्य का विकास नहीं, बंटाधार किया है। PK ने जेडीयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी बेटी को लोकसभा टिकट दिलाने के लिए पैसे दिए। इसके बाद अशोक चौधरी ने मानहानि का केस कर दिया है।

बीजेपी नेताओं पर भी PK का हमला जारी है 

दिलीप जायसवाल पर माइनॉरिटी मेडिकल कॉलेज में गड़बड़ी का आरोप मंगल पांडेय पर भ्रष्टाचार के आरोप सम्राट चौधरी के हलफनामे में गड़बड़ी का दावा हालांकि, बीजेपी और जेडीयू के कुछ नेताओं ने इन आरोपों पर चुप्पी साध ली है, जो खुद कई सवाल खड़े कर रही है।

मुकेश सहनी: महागठबंधन में हैं, लेकिन शर्तें हैं सख्त

वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, महागठबंधन में शामिल तो हैं, लेकिन उनकी मांगें इतनी ऊंची हैं कि अब उनकी एनडीए में वापसी की चर्चा भी तेज हो गई है। उन्होंने 60 सीटें और डेप्युटी सीएम पद की मांग रख दी है, जिसे तेजस्वी यादव के लिए मानना मुश्किल है। हाल ही में वे महागठबंधन की बैठक से गायब रहे और दिल्ली दौरे पर निकल गए, जिससे राजनीतिक हलकों में यह चर्चा और तेज हो गई कि वे दोबारा NDA का रुख कर सकते हैं।

 सहनी का ‘पैंतरा’ या रणनीति?

मुकेश सहनी खुद तो कहते हैं कि वे महागठबंधन नहीं छोड़ेंगे, लेकिन उनका सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें 60 सीटों का संकल्प दिखा, उनकी रणनीति का संकेत दे रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर उन्हें तवज्जो नहीं मिली, तो वे 2020 की तरह NDA में लौट सकते हैं। चाहे PK की पोल खोल राजनीति हो या सहनी की शर्तों की सियासत, इन दोनों नेताओं ने बिहार के सियासी समीकरणों को गर्मा दिया है। तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार जैसे स्थापित नेताओं के लिए अब 2025 की राह इतनी आसान नहीं दिख रही।

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