नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की दो सदस्यीय पीठ इस मामले को देखेगी। विपक्षी दलों का आरोप है कि ड्राफ्ट सूची से करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम बिना ठोस कारण हटाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग का जवाब
सुनवाई से पहले सोमवार को चुनाव आयोग ने Supreme Court में अपना जवाब दाखिल किया। आयोग ने कहा, कानून के तहत मसौदा सूची से गायब नामों की अलग सूची बनाने की कोई बाध्यता नहीं है। नाम हटाने के कारण सार्वजनिक करने की भी जरूरत नहीं है। अब तक किसी भी पार्टी ने नाम हटाने या जोड़ने पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।
SIR के आंकड़े
24 जून से 25 जुलाई तक हुए SIR के दौरान बिहार में कुल मतदाता 7.89 करोड़, फॉर्म जमा करने वाले 7.24 करोड़, 91.69% मृत पाए गए मतदाता 22 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित/गायब 36 लाख कई जगह नामांकित 7 लाख 0.89% अब तक 10,570 मतदाताओं ने नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म भरे हैं।
विपक्ष के आरोप और आयोग का फैक्ट चेक
कांग्रेस और राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया, लेकिन चुनाव आयोग ने इन्हें तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। आयोग ने पारदर्शिता के सबूत के तौर पर दस्तावेज और बैठकों के रिकॉर्ड जारी किए, जिसमें RJD, कांग्रेस और भाकपा के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी शामिल है।
Supreme Court का रुख
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने SIR प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई थी, लेकिन चेतावनी दी थी कि अगर बड़ी संख्या में नाम हटाए गए तो वह हस्तक्षेप कर सकता है। आज की सुनवाई में प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर बहस होगी। 65 लाख नाम हटाने के दावे से बिहार की राजनीति गरमा गई है। ADR की याचिका में कहा गया है कि मतदाताओं को बिना वजह सूची से बाहर किया जा रहा है, जिससे चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठते हैं।




