नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र का आज चौथा दिन भी हंगामेदार रहा। विपक्ष ने एक बार फिर Systematic Investigation of Register यानी मतदाता सूची के सत्यापन अभियान का जोरदार विरोध किया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने विधानसभा में कहा कि यह प्रक्रिया गरीबों और प्रवासी मजदूरों को वोट के अधिकार से वंचित करने की साजिश है।
तेजस्वी ने नीतीश सरकार से मांगा जवाब
तेजस्वी यादव ने विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव से कहा कि बुधवार को SIR पर हुई चर्चा अधूरी रह गई थी, इसलिए आज फिर इस पर विस्तार से बात होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की कि वे सदन में स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दें कि किसी भी बिहारी का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा।
आधार-पैन क्यों नहीं मान्य?
तेजस्वी ने सवाल उठाया कि जब देशभर में पहचान के लिए आधार और पैन कार्ड मान्य हैं, तो SIR में इन्हें स्वीकार क्यों नहीं किया जा रहा? उन्होंने कहा,”ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो गरीबों और प्रवासी मजदूरों के पास नहीं हैं। करोड़ों बिहारी बाहर काम करते हैं। वे कैसे फॉर्म भरेंगे? तेजस्वी यादव ने कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बाबा साहेब के संविधान और लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने कहीं नहीं कहा कि वेरिफिकेशन के दौरान कोई घुसपैठिया मिला है, फिर भी एनडीए नेता बिना प्रमाण के दावा कर रहे हैं।
काले कपड़ों में विपक्ष का विरोध प्रदर्शन
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले महागठबंधन के विधायकों ने काला कुर्ता पहनकर विधानसभा पोर्टिको में प्रदर्शन किया। उनके हाथों में पोस्टर-बैनर थे, जिन पर लिखा था SIR वापस लो, वोटबंदी नहीं चलेगी, NDA सरकार हटाओ, उन्होंने मांग की कि SIR के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया जाए। तेजस्वी ने याद दिलाया कि SIR का विरोध सिर्फ विपक्ष नहीं कर रहा है। खुद जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने भी इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। इससे साफ है कि SIR को लेकर NDA के भीतर भी असहमति है।




