नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार में फर्जी नामों से निवास प्रमाण पत्र बनवाने का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले डॉग बाबू, सोनालिका ट्रैक्टर और डोनाल्ड ट्रंप के नाम से निवास प्रमाणपत्र बनाने के मामले चर्चा में आए थे। अब रोहतास जिले से एक अजीब मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति ने बिल्ली के नाम से निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया है। नासरीगंज प्रखंड में ऑनलाइन आवासीय प्रमाण पत्र के लिए एक आवेदन आया, जिसमें आवेदक का नाम ‘कैट कुमार’, पिता का नाम ‘कैटी बॉस’ और माता का नाम ‘कैटिया देवी’ दर्ज था। आवेदन में गांव का नाम ‘अतीमीगंज’, वार्ड संख्या 7, थाना नासरीगंज और पिन कोड 821310 शामिल था, जबकि आवेदन का उद्देश्य स्टडी बताया गया था।
इस आवेदन का क्रमांक BRCCO/2025/18001397 था। जैसे ही यह मामला सामने आया, प्रशासन हरकत में आ गया। रोहतास की डीएम उदिता सिंह ने नासरीगंज के राजस्व कर्मी कौशल पटेल को मामले की जांच का निर्देश दिया और थाना में केस दर्ज कराया। आवेदन में आवेदक का मोबाइल नंबर और ईमेल एड्रेस भी दर्ज था, जिससे यह स्पष्ट है कि यह जानबूझकर किया गया था।
कुत्ते, ट्रैक्टर और डोनाल्ड ट्रंप के बाद बिल्ली के नाम से निवास प्रमाणपत्र आवेदन
बिहार में फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाने के मामले अब एक मजेदार रुझान बनते जा रहे हैं। रोहतास जिले में कुत्ते, ट्रैक्टर और डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब एक बिल्ली के नाम से निवास प्रमाण पत्र बनाने का मामला सामने आया है। यह घटना न केवल प्रशासन की परेशानी बढ़ाती है, बल्कि सरकारी कामों में भी बाधा उत्पन्न करती है। हालांकि, इस बार प्रशासन ने इसे फॉल्स एप्लिकेशन मानते हुए रिजेक्ट कर दिया।
डीएम उदिता सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि गलत और काल्पनिक नामों से आवेदन करना गंभीर अपराध है, जो सरकारी कार्यों में बाधा डालता है। प्रशासन अब मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस तरह के फर्जी आवेदन देने के पीछे असली उद्देश्य क्या था। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिल्ली के नाम से आवेदन करने के पीछे कौन है और उनका मकसद क्या था। प्रशासन इस मामले को न सिर्फ सरकारी काम में बाधा डालने के रूप में देख रहा है, बल्कि यह इस दिशा में भी जांच कर रहा है कि किसके द्वारा और क्यों ऐसा कदम उठाया गया।
लोगों का मानना है कि यदि ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो निवास प्रमाण पत्र की ऑनलाइन प्रक्रिया में बदलाव किया जा सकता है। इससे आम जनता को दफ्तरों के चक्कर लगाने की परेशानी हो सकती है, जो पहले से ही एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।




