नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । बिहार की राजनीति में एक बार फिर से सियासी तूफान मचा है। जहां आरजेडी के विधायक भरत भूषण मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके मंत्रिमंडल पर तीखा हमला बोलते हुए विवादित बयान दे दिया है। अब उनका यह बयान प्रदेश की राजनीति में नए सियासी संकट का कारण बन सकता है।
बता दें कि, मधुबनी जिले के लौकहा से विधायक भरत भूषण मंडल ने सुपौल के छातापुर प्रखंड के बलुआ बाजार स्थित आदर्श मध्य विद्यालय मैदान में आयोजित अतिपिछड़ा चेतना संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, नीतीश से बड़ा ऊंची जात का दलाल बिहार में आज तक पैदा नहीं हुआ। इनके बगल में बैठते हैं संजय झा। अररिया और झंझारपुर में तो नारा तक लिखा गया है नीतीश जूता खाए खगड़िया में, आराम करे अररिया में। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि,मुख्यमंत्री कभी ललन सिंह तो कभी विजय चौधरी के घर आराम फरमाते हैं और पिछड़ों का अपमान करते हैं।
आरजेडी विधायक ने स्थानीय मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू पर भी तीखा हमला बोला और कहा, ये जो टुच्चा नेता बैठा है बबलू सिंह, इसे मिट्टी में दफना दो, एक भी वोट मत दो। इस बीच उन्होंने आरजेडी नेता बैद्यनाथ मेहता को विधानसभा चुनाव में जिताने की अपील भी की।
भरत भूषण मंडल ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को जमकर निशाने पर लेते हुए कहा, दोनों पार्टियों में शीर्ष पदों पर ब्राह्मण ही बैठे हैं, जिससे पिछड़ों और दलितों का लगातार शोषण हो रहा है। उन्होंने लालू प्रसाद यादव को गरीबों और पिछड़ों का असली नेता बताते हुए चेतावनी दी कि, ऊंची जात के लोग सत्ता पर कब्जा करने की फिर से साजिश रच रहे हैं। इसी के साथ उन्होंने सभा में नारा भी दिया, वोट हमारा, राज तुम्हारा… अब नहीं चलेगा।
राजनीतिक गलियारे में सियासी हलचल तेज
आरजेडी विधायक के इस विवादित बयान के बाद राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज हो गई है। भाजपा और JDU के नेताओं ने इस बयान की कड़ी निंदा की है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी स्तर पर भी इस मामले की समीक्षा की जा रही है और आगामी दिनों में सियासी बयानबाजी का दौर और तेज होने की संभावना है।
नीतीश सरकार की पिछड़ों के लिए कई योजनाएं
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने पिछड़ों और कमजोर वर्गों के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जिनमें मुफ्त शिक्षा, रोजगार गारंटी योजना, और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं शामिल हैं। ऐसे में विधायक के बयान ने राजनीतिक समरसता को चुनौती दे दी है।





