नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के दलों की बड़ी बैठक पटना में तेजस्वी यादव के आवास पर हुई। करीब पांच घंटे चली इस बैठक में सीट बंटवारे, चुनाव रणनीति और नेतृत्व के मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। बैठक में राजद, कांग्रेस, वीआईपी, वाम दलों के प्रमुख नेता मौजूद रहे।
मुकेश सहनी का बयान बना चर्चा का विषय
बैठक खत्म होने के बाद पत्रकारों ने जब वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी से सवाल किया कि “डिप्टी सीएम कौन होगा? तो उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया ये भी कोई कहने की बात है क्या? शुभ शुभ बोलो यार… हम ही सरकार बनाएंगे और हम ही डिप्टी सीएम बनेंगे। उनका यह बयान सियासी गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सहनी का यह बयान न सिर्फ आत्मविश्वास दिखाता है, बल्कि महागठबंधन के अंदर सीटों और पदों की खींचतान पर भी एक संकेत देता है।
सीट बंटवारे पर लंबी बातचीत
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमति बनाने की कोशिश की गई। राजद इस बार ज्यादा सीटें अपने पास रखना चाहती है, जबकि कांग्रेस और वीआईपी दोनों अपने-अपने प्रभाव वाले इलाकों में ज्यादा हिस्सेदारी मांग रहे हैं। हालांकि, अब तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है। तेजस्वी यादव ने बैठक में सभी दलों से कहा कि चुनाव से पहले एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जनता हमें एक विकल्प के रूप में देख रही है, इसलिए समर्पण और सहयोग जरूरी है।
‘सन ऑफ मल्लाह’ की सियासी चाल
मुकेश सहनी, जिन्हें सन ऑफ मल्लाह कहा जाता है, ने हमेशा पिछड़े वर्ग और मछुआरा समाज के अधिकारों की आवाज उठाई है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब वे अपनी पार्टी वीआईपी को महागठबंधन में एक मजबूत स्थिति दिलाने की कोशिश में हैं। उनकी महत्वाकांक्षा साफ है सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि सत्ता साझेदार के रूप में खुद को स्थापित करना।
महागठबंधन में हलचल, NDA की निगाहें भी टिकीं
सहनी के इस बयान से महागठबंधन के भीतर हलचल मच गई है। जहां राजद समर्थक इसे “आत्मविश्वास का इज़हार” बता रहे हैं। वहीं कुछ नेताओं का मानना है कि यह बयान ‘पावर शेयरिंग’ को लेकर जल्दबाजी भरा कदम है। उधर, एनडीए खेमे में भी इस बयान को लेकर हलचल है। भाजपा नेताओं का कहना है कि महागठबंधन अंदर से बिखरा हुआ है और सबको कुर्सी की चिंता है। अब सबकी निगाहें अगली समन्वय बैठक पर टिकी हैं, जहां सीट बंटवारे को लेकर अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है।
महागठबंधन की रणनीति होगी एकजुट होकर नीतीश कुमार और भाजपा गठबंधन को चुनौती देना।





