नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीतिक गहमागहमी अब अपने चरम पर है, और सीमांचल एक बार फिर सियासत का नया अखाड़ा बनता दिख रहा है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को पूर्णिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की मोदी सरकार और बिहार के सियासी गठबंधनों पर सीधा हमला बोला। ओवैसी ने कहा, बिहार में अभी खेल बाकी है। सीमांचल की लड़ाई AIMIM खुद लड़ेगी, किसी से मोहब्बत की उम्मीद नहीं।
क्रिकेट बनाम शहीद: ओवैसी का तीखा सवाल – ’26 जानों की कीमत 3000 करोड़?’
पाकिस्तान से क्रिकेट खेलने को लेकर ओवैसी ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, जब 26 भारतीय नागरिक आतंकवाद में मारे गए, तब हमने सरकार से कहा था कि क्रिकेट मत खेलिए। पीएम मोदी ने खुद कहा था ‘पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते’, फिर अब क्यों मैच हो रहे हैं? अगर खेलना ही है तो व्यापार और पानी क्यों रोका गया? ये दोहरा मापदंड क्यों?
‘घुसपैठ’ के नाम पर सीमांचल को बदनाम न करें: ओवैसी का पलटवार
AIMIM सांसद ने सीमांचल के मुसलमानों को ‘घुसपैठिया’ कहे जाने पर भी कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, सीमांचल की अवाम पहले से ही सरकारी नजरअंदाजी की शिकार है। अब उन पर घुसपैठ का ठप्पा लगाकर और जलील किया जा रहा है। अगर घुसपैठ हुई है तो वो केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों की विफलता है। और जो बांग्लादेश से आईं ‘शेख हसीना’ हैं, पहले उन्हें दिल्ली से निकाला जाए। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा पर निगरानी के लिए BSF की तैनाती है, लेकिन सीमाओं की संवेदनशीलता के कारण अवैध घुसपैठ के आरोप अक्सर राजनीतिक तूल पकड़ते हैं।
युवाओं पर फोकस: ‘58% Gen Z वोटर क्या सोच रहे हैं?
ओवैसी ने बिहार के युवाओं को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि राज्य में 58% वोटर ऐसे हैं जो 25 वर्ष से कम उम्र के हैं। AIMIM प्रमुख ने पूछा, इतना बड़ा युवा वर्ग बेरोजगार बैठा है, आपके योजनाओं का फायदा उन्हें क्यों नहीं मिला? ना रोजगार, ना शिक्षा, ना सम्मान। यही युवा तय करेगा कि 2025 में किसकी सरकार बनेगी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में करीब 5 करोड़ 25 लाख वोटर हैं, जिनमें लगभग 3 करोड़ वोटर 18-25 आयु वर्ग के हैं। यही चुनाव की सबसे बड़ी निर्णायक ताकत माने जा रहे हैं।
AIMIM का प्लान क्या है?
सीमांचल की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का संकेत।
न्याय यात्रा के जरिए मुस्लिम और पिछड़े वर्गों को साधने की कोशिश।
बड़े दलों पर मुस्लिम वोट बैंक को इस्तेमाल करने का आरोप।





