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Tuesday, March 10, 2026
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बेगूसराय में किया गया ‘फरोग-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा’ का आयोजन, उर्दू की साहित्यिक परंपरा को समृद्ध करना

किसी भाषा को किसी धर्म अथवा संप्रदाय के प्रतिनिधि मात्र रूप में देखे जाने के बदले अभिव्यक्ति का साधन मानकर उसके संरक्षण एवं विकास के लिए प्रयास करने की अपील की।

बेगूराय, एजेंसी। जिला उर्दू भाषा कोषांग बेगूसराय द्वारा शनिवार को कारगिल विजय भवन में एक दिवसीय उर्दू कार्यशाला फरोग-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अपर समाहर्ता राजेश कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

उर्दू भाषा को बिहार की दूसरी सरकारी भाषा होने का गौरव प्राप्त है

मौके पर अपर समाहर्ता सहित अन्य ने जिला उर्दू भाषा कोषांग के जिला उर्दूनामा बेगूसराय का विमोचन किया गया। इस अवसर पर अपर समाहर्ता ने कहा कि उर्दू महत्वपूर्ण भाषा है और उस भाषा को बिहार की दूसरी सरकारी भाषा होने का गौरव प्राप्त है। ऐसे में हम सब की जिम्मेदारी बनती है कि उर्दू सीखें और इसे आमजनों तक पहुंचाएं। उन्होंने किसी भाषा को किसी धर्म अथवा संप्रदाय के प्रतिनिधि मात्र रूप में देखे जाने के बदले अभिव्यक्ति का साधन मानकर उसके संरक्षण एवं विकास के लिए प्रयास करने की अपील की। अपर समाहर्ता ने भविष्य में इस प्रकार के कार्यक्रम को और भी विस्तार देने के लिए प्रतिभागियों के साथ-साथ अधिक-से-अधिक संख्या में श्रोताओं को भी शामिल करने का निर्देश दिया। जिससे राज्य की द्वितीय राजभाषा उर्दू के विकास और उसके प्रचार-प्रसार को बल मिल सके।

उर्दू की साहित्यिक परंपरा को समृद्ध करना

जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी-सह-प्रभारी पदाधिकारी उर्दू भाषा कोषांग श्री रतन ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उर्दू निदेशालय मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग बिहार सरकार एवं जिला उर्दू कोषांग बेगूसराय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से उर्दू की साहित्यिक परंपरा को समृद्ध करना है। उर्दू कार्यशाला फरोग-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा के दौरान लनामिवि के पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. जफर हबीब, एस.के. महिला कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. यास्मीन अख्तर, अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू बेगूसराय के अध्यक्ष गुलाम मोहम्मद चांद, हसन इमाम बोतल, इफ्तिखार आकिफ, मुकुल लाल इल्तजा, प्रफुल्ल कुमार, ममता मल्होत्रा सहित छात्र-छात्राओं ने नज्मों, शायरी, कविताओं, आलेखों एवं अन्य साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। कार्यक्रम का संचालन वरीय उर्दू अनुवादक मो. शहबाज अहमद एवं शाहिद हसन खां ने किया।

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