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Saturday, March 21, 2026
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Delhi Pollution: दिल्ली-NCR में दम घोंटू हवा का कहर -AQI 400 के पार, लोग हुए परेशान

दिल्ली-एनसीआर में हवा इतनी जहरीली हो गई है कि सुबह-सुबह धुंध की चादर ने दृश्यता आधी-घटाई जिससे आम लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। आज सुबह CPCB ने दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 341 दर्ज किया यह बहुत खराब श्रेणी में आता है। वहीं कुछ इलाकों में AQI 400 के पार चला गया है, जो गंभीर श्रेणी कहलाता है। उदाहरण के लिए Bawana में AQI था 419। Jahangirpuri में 414, Wazirpur में 409। विजिबिलिटी यानी दृश्यता भी बहुत कम हो गई है। कई जगहों पर 50 मीटर से भी कम। जैसे कि Ghazipur landfill के आस-पास सफेद-ग्रे धुंए की मोटी परत जमा है। ठंडी हवा, शांत मौसम, और धूल-निर्माण वाली गतिविधियों ने मिलकर हालात और बिगाड़े हैं।

क्यों हुआ ऐसा?

सर्दी के साथ हवा में चलने-फिरने की शक्तिशाली हवाओं की कमी हो रही है, जिससे प्रदूषित कण ट्रैप हो जाते हैं। निर्माण, खनन, वाहनों, ईंधन-ज्वलन उचित नियंत्रण के बिना जैसी गतिविधियाँ धूल और प्रदूषण पैदा कर रही हैं। पास के राज्यों में खुले में फसलों की बाली जलाना, अन्य स्रोतों से धुआँ-धूल ये बातें भी दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में योगदान दे रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ ग्रिडेड प्लान बनाना पर्याप्त नहीं उसकी कड़क अमल और मौसम-अनुकूल कार्रवाई भी चाहिए।

 क्या किया जा रहा है?

CAQM ने 11 नवंबर 2025 को पूरा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में Graded Response Action Plan (GRAP) Stage III लागू कर दिया है। जब AQI 401-450 के बीच हो जाए तब के अंतर्गत प्रतिबंधित [कुछ प्रमुख बातें]: गैर-आवश्यक निर्माण, खुदाई, ट्रेंचिंग, पिलिंग, ईंट-भट्ठा आदि को तुरंत रोकना। BS-III पेट्रोल व BS-IV डीजल चार-पहिया वाहनों को चलना प्रतिबंधित। सामग्री जैसे सीमेंट, रेत, फ्लाई-ऐश आदि का अनपवेड रोड पर ढुलाई व अन्य धूल-उत्पादक गतिविधियों पर पाबंदी। स्कूलों को हाइब्रिड मोड पर ले जाना, विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए बाहर निकलना सीमित करना। 

कोर्ट-सर्कुलेशन, निर्माण कार्यों में कमी, वाहनों की चेकिंग जैसे कदम दिए गए हैं, लेकिन हवा की गुणवत्ता अभी बहुत खराब से गंभीर के बीच बनी हुई है। 

इसका मतलब यह है कि बुनियादी स्रोतों को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया गया, या मौसम ने ऐसा माहौल बनाया कि इन प्रयासों का असर तुरंत नहीं दिख पाया। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि सिर्फ उपाय लागू करना काफी नहीं; उसकी निगरानी, बचाव-उपाय और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी ज़रूरी है। घर से बाहर तुरंत निकलने की बजाय मास्क (एन95/KN95) पहनें, विशेषकर यदि सांस या अस्थमा की समस्या हो। सुबह-शाम धुंध के समय व्यायाम बाहर न करें, बच्चों और बुज़ुर्गों को घर में ही रखें। घर के अंदर हवा को ज्यादा साफ़ रखें हवा चलने वाली खिड़कियाँ खोलें जब धुंध कम हो, एयर प्यूरीफायर या पंखा इस्तेमाल करें। वाहनों का उपयोग कम करें, सार्वजनिक परिवहन व साइकिल/पैदल यथासंभव अपनाएँ। निर्माण, धूल-उत्पादन वाली क्रियाओं से दूरी बनाएं। अगर आप निर्माण कार्य में हैं, तो धूल उड़ने से रोकने के उपाय अपनाएँ। आस-पास उस इलाके में खुले में जलाई जाने वाली क्रियाओं पर ध्यान दें और सूचना दें यदि कुछ नियमों के विरुद्ध हो रहा हो। दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर खतरनाक हवा के दौर से गुजर रहा है जिसमें AQI 300-400 से ऊपर है, कई इलाकों में 400 तक पहुँच गया है गंभीर श्रेणी में। नियम-कानून लागू तो हो गए हैं GRAP III लेकिन परीणाम अभी तेजी से नहीं दिख रहा। इसलिए यह समय है कि सरकार, स्थानीय प्रशासन, उद्योग, नागरिक सभी मिलकर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करें, वरना यह पुरानी समस्या हर सर्दी में दोहराती रहेगी।

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