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Saturday, March 14, 2026
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रेलवे का बड़ा फैसला, अब वेटिंग टिकट की सीमा होगी तय, यात्रियों को मिलेगी राहत

Indian Railways ने रिजर्वेशन चार्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव शुरू किया है। अब ट्रेन डिपार्चर से 24 घंटे पहले चार्ट तैयार होगा, जिससे यात्रियों की परेशानी कम हो जाएगी।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । तत्काल टिकट के बाद रेलवे ने वेटिंग टिकट को लेकर बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत एसी और स्लीपर क्लास में वेटिंग टिकट की संख्या सीमित कर दी जाएगी। अगर आप ट्रेन से यात्रा करते हैं तो यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है। हाल ही में IRCTC द्वारा तत्काल टिकट प्रक्रिया में किए गए बदलावों के बाद, भारतीय रेलवे ने वेटिंग टिकट के नियमों में बड़ा संशोधन किया है। अब रेलवे हर ट्रेन की सभी श्रेणियों (AC1, AC2, AC3, स्लीपर और चेयर कार) में कुल सीटों का केवल 25 प्रतिशत वेटिंग टिकट के लिए जारी करेगा। वेटिंग टिकट में विकलांग कोटे और अन्य विशेष श्रेणियों की सीटें शामिल नहीं होंगी। रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को कन्फर्म टिकट न मिलने की अनिश्चितता से बचाना है।

यह निर्णय क्यों लिया गया?

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, आमतौर पर 20 से 25 प्रतिशत वेटिंग टिकट यात्रा शुरू होने से पहले कन्फर्म हो जाते हैं। रेलवे बोर्ड के सर्कुलर के बाद सभी जोनल रेलवे इस नियम को लागू करने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि पहले वेटिंग टिकट की संख्या अधिक होने के कारण कई यात्री रिजर्व कोच में बिना कन्फर्म टिकट के चढ़ जाते थे, जिससे ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाती थी और कन्फर्म टिकटधारकों को परेशानी होती थी।

पहले क्या था नियम?

जनवरी 2013 के नियमों के अनुसार AC1 में 30, AC2 में 100, AC3 में 300 और स्लीपर में 400 तक वेटिंग टिकट जारी किए जाते थे। अब नई नीति के अनुसार हर जोनल रेलवे अपनी बुकिंग और कैंसिलेशन के पैटर्न के हिसाब से वेटिंग टिकट की सीमा तय करेगा। पश्चिम रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले वेटिंग टिकट की अधिकता के कारण ट्रेनों में यात्रियों की संख्या कन्फर्म टिकट से कहीं ज्यादा हो जाती थी, जिससे यात्रियों को परेशानी होती थी। नए नियम से यात्रियों को बेहतर सेवा मिलेगी।

उपलब्ध बर्थ का क्या अर्थ है?

‘उपलब्ध बर्थ’ का मतलब है उन सीटों की संख्या जो वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, विदेशी पर्यटकों और दिव्यांगों के लिए निर्धारित कोटे के बाद सामान्य बुकिंग के लिए बची होती हैं। उदाहरण के तौर पर यदि सभी कोटे लागू करने के बाद 400 सीटें बचती हैं, तो वेटिंग टिकट अधिकतम 100 तक जारी किए जा सकेंगे। पहले वेटिंग टिकट की अधिक संख्या के कारण खासकर त्योहारों पर यात्रियों को बहुत दिक्कत होती थी। नए नियम के तहत अब हर कोच में कुल उपलब्ध सीटों का 25 प्रतिशत से अधिक वेटिंग टिकट नहीं मिलेगा।

एक अधिकारी ने बताया कि यह नियम सभी कैटेगरी की सीटों पर लागू होगा और इसे तत्काल टिकट तथा दूरदराज की बुकिंग पर भी लागू किया जाएगा। हालांकि, यह सीमा रियायती किराए या सरकारी वारंट वाले टिकटों पर लागू नहीं होगी। पश्चिम रेलवे ने सर्कुलर जारी करते हुए बताया है कि इसे लागू करने के लिए CRIS सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे और लागू करने की तारीख जल्द घोषित की जाएगी।

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