नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। मनोरंजन जगत से एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। Sarabhai vs Sarabhai शो के एक्टर सतीश शाह ने इस दुनिया को अलविदा कर दिया है। उनके दोस्त अशोक पंडित ने इस बात की जानकारी दी है। आपको बता दें, एक्टर कई दिनों से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और किडनी फेलियर के कारण उनका निधन हो गया।
चार दशकों का सुनहरा सफर
सतीशशाह का जीवन अभिनय के हर रंग से रंगा रहा। उनका करियर चार से अधिक दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने 200 से ज़्यादा फिल्मों और अनेक यादगार टीवी शोज़ में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनका जन्म 25 जून 1951 को मुंबई में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था, और इस जुनून ने ही उन्हें फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे तक पहुँचाया, जहाँ से उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं।
‘जाने भी दो यारों’ से लेकर ‘सराभाई बनाम सराभाई’ तक
सतीश शाह ने 1978 में फिल्म अर्विंद देसाई की अजीब दास्तान से फिल्मों में कदम रखा, लेकिन उन्हें पहचान मिली 1983 की कल्ट क्लासिक ‘जाने भी दो यारों’ से, जिसमें उन्होंने कमिश्नर डी’मेलो का किरदार निभाया था एक ऐसा हास्यपात्र जो आज भी सिनेमा प्रेमियों की स्मृतियों में ज़िंदा है।
टीवी पर उन्होंने 1984 की प्रसिद्ध कॉमेडी ‘ये जो है ज़िंदगी’ में एक के बाद एक कई किरदार निभाकर दर्शकों को चौंका दिया था। पर उनकी असली पहचान बनी ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ के इन्द्रवदन साराभाई के रूप में एक व्यंग्यप्रिय, शरारती और चुटीले पिता की भूमिका जिसने उन्हें घर-घर में प्रिय बना दिया।
बॉलीवुड में बहुमुखी उपस्थिति
सतीश शाह ने केवल कॉमेडी तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने गंभीर भूमिकाओं और पारिवारिक फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ी।
उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं
जाने भी दो यारों, हम साथ-साथ हैं, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे,कभी हाँ कभी ना,कल हो ना हो,मैं हूँ ना,ओम शांति ओम,हर फिल्म में उन्होंने अपने किरदार को इस सहजता से जिया कि दर्शक मुस्कराए बिना नहीं रह सके।
सहकलाकारों ने जताया शोक
सतीश शाह के निधन की खबर सुनते ही फिल्म और टीवी जगत में शोक की लहर दौड़ गई।‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ में उनकी सहकलाकार रत्ना पाठक शाह ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा,सतीश जी सिर्फ एक कलाकार नहीं, एक संस्था थे। उनका टाइमिंग और विनम्रता दोनों ही अद्वितीय थे। निर्देशक कुंदन शाह, जिनके साथ उन्होंने जाने भी दो यारों जैसी अमर फिल्म की थी, उन्हें हंसाने वाला स्कूल भीकहा करते थे।
टेलीविजन पर उनका सबसे यादगार और कल्ट किरदार ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ में इंद्रावदन साराभाई का था। अपने मजाकिया और व्यंग्यात्मक अंदाज के कारण यह रोल भारतीय टीवी इतिहास के सबसे लोकप्रिय कॉमिक किरदारों में गिना जाता है। इसके अलावा, 1984 के लोकप्रिय सिटकॉम ‘ये जो है जिंदगी’ में भी उनका अभिनय बेहद सराहा गया था। सतिश शाह अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका बनाया हर किरदार, हर ठहाका और हर संवाद, आने वाली पीढ़ियों तक गूंजता रहेगा।उनकी यह विदाई केवल एक अभिनेता की नहीं, बल्कि भारतीय कॉमेडी के एक युग की विदाई है। सतीश शाह ने अपने अभिनय से न केवल हँसी दी, बल्कि समाज के व्यंग्य और मानवीय भावनाओं को भी बखूबी पर्दे पर उतारा।उनके संवाद, उनकी मुस्कान और उनका अंदाज़ भारतीय दर्शकों की स्मृतियों में हमेशा जिंदा रहेंगे।




