नई दिल्ली /रफ्तार डेस्क । राजधानी दिल्ली में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। बुधवार को हल्की बारिश और घने बादलों की वजह से तापमान में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन गुरुवार को सूरज की तेज धूप के साथ पारा तेजी से ऊपर चढ़ गया। दिनभर साफ आसमान और हल्की हवा के चलते मौसम सुहावना तो रहा, मगर तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई।
बीते 24 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में करीब 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई, जबकि अधिकतम तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया। गुरुवार को न्यूनतम तापमान लगभग 11 से 12 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। मौसम में इस अचानक बदलाव ने लोगों को गर्मी का अहसास फिर से करा दिया है।
22 फरवरी से मौसम में हलचल के संकेत
मौसम विभाग के अनुसार 22 फरवरी से पश्चिमी हिमालयी इलाकों में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके असर से राजधानी के मौसम में हल्का परिवर्तन देखने को मिल सकता है, हालांकि फिलहाल किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की गई है। आने वाले छह दिनों में न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी के आसार जताए गए हैं। गुरुवार को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो बुधवार के मुकाबले 6.9 डिग्री अधिक और सामान्य से 3.6 डिग्री ऊपर रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 11.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो एक दिन पहले की तुलना में 4.4 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया।
बारिश बेअसर, फिर बिगड़ी दिल्ली की हवा
राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण से राहत अभी दूर नजर आ रही है। बुधवार की हल्की बारिश के बाद गुरुवार सुबह हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार दिखा, लेकिन शाम होते-होते हालात फिर बिगड़ गए और हवा दोबारा ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 164 दर्ज किया गया था। हालांकि शाम चार बजे तक यह बढ़कर 208 हो गया। यानी महज आठ घंटों में 44 अंकों की उछाल दर्ज की गई। शाम छह बजे शहर के 16 इलाकों में AQI 200 के पार चला गया, जो खराब श्रेणी को दर्शाता है।
मानकों के अनुसार, हवा तभी सुरक्षित मानी जाती है जब पीएम10 का स्तर 100 और पीएम2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से नीचे रहे। गुरुवार शाम छह बजे दिल्ली-एनसीआर में पीएम10 का स्तर 152.6 और पीएम2.5 का स्तर 80.1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो तय मानकों से काफी अधिक है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष अक्टूबर से ही राजधानी में प्रदूषण का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है। लंबे समय तक खराब हवा के कारण लोगों को सांस और अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ी।





