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Wednesday, March 18, 2026
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Navratri 2nd day: मां ब्रह्मचारिणी कि इस प्रकार करें पूजा अर्चना, इन मंत्रों का भी करें जाप

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जाती है उन्हें प्रसन्न करने के लिए कुछ मंत्रों के भी जाप करते हैं।

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। नवरात्रि के शुरुआत से ही माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना शुरू हो जाती है। हर दिन अलग-अलग दिन पर अलग-अलग माता की पूजा अर्चना की जाती है। आपको बता दें कि, आज नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना करके उनका आशीर्वाद पाया जाता है। माता की पूजा अर्चना विशेष विधि के साथ की जाती है ताकि उनकी कृपा आपके घर परिवार में बनी रहे और सदैव उन्नति और तरक्की प्राप्त करें। साथ ही उनके विशेष मंत्रों का भी जाप किया जाता है।

माता ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्व 

नवरात्रि के दूसरे दिन, देवी का दूसरा रूप है “मां ब्रह्मचारिणी”। की बड़े ही धूमधाम से जातक पूजा अर्चना करते हैं। इस रूप में मां दुर्गा ने भगवान शिव का ध्यान करते हुए ब्रह्मचर्य की तपस्या की थीं। इस रूप में देवी का चेहरा शानदार होता है और वह धनुष और कमंडलु धारण करती हैं। इसका अर्थ है कि मां ब्रह्मचारिणी अपने आत्मा की अद्वितीयता में लीन रहती हैं और तपस्या में लगी रहती हैं।

पूजा विधि

मां ब्रह्मचारिणी की बड़े ही भाव और सच्चे मन से की जाती है। क्योंकि नवरात्रि में मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से विद्या, ध्यान, और तप की शक्ति मिलती है। पूजा के लिए सफेद वस्त्र, चाँदन, कुमकुम, फूल, और नैवेद्य की वस्तुएं उपयोग की जाती हैं। मां ब्रह्मचारिणी को धूप और दीप से पूजा जाता है, और उनके चरणों में रोली और चावल चढ़ाया जाता है। साथ ही मिठाई को भोग के रूप में रखा जाता है। इसके बाद माता रानी की आरती की जाती हैं।

इन मंत्रों का करें जाप

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:।

ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:

वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥

गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥

परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

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डिसक्लेमर

 

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है,और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगक की

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