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कोरोना कुप्रबंधन के कारण कानून व्यवस्था की स्थिति बिगडऩे की संभावनाः भूपेन्द्र गुप्ता

भोपाल, 08 अप्रैल (हि.स.)। कोरोना प्रबंधन में आपातकालीन व्यवस्थाओं की पूर्ति ना कर पाने के कारण प्रदेश के अस्पतालों में कानून व्यवस्था की परिस्थितियां पैदा हो रही हैं। यह आरोप प्रदेश कांग्रेस मीडिया उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने लगाया है। उन्होंने सरकार को चेताया है कि बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में कल रात जो भयानक परिस्थितियां पैदा हुई हैं वैसी परिस्थितियां प्रदेश में ना फैलें इसके लिये सरकार युद्ध स्तर पर जुटे। गुप्ता ने गुरुवार को जारी अपने बयान में कहा कि कल रात बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में मरीजों के परिजनों, डॉक्टरों, और सुरक्षा कर्मचारियों के बीच में खुला संघर्ष हुआ है। जिसमें आधी रात को पुलिस बल को बुलाना पड़ा है। भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रशासन की ओर से संभाग आयुक्त ने स्वयं बताया है कि 30 से 40 जंबो सिलेंडर की बीएमसी में प्रति घंटे खपत हो रही है। 203 सिलेंडर स्टॉक में है और लिक्विड ऑक्सीजन आने की संभावना है। संभागायुक्त के इस बयान को आधार माना जाए तो बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में केवल 6 घंटे की ऑक्सीजन का स्टॉक शेष है। सरकार को बताना चाहिए कि क्या मात्र 6 घंटे की आक्सीजन व्यवस्था लेकर ही इतनी बड़ी महामारी से लड़ाई लड़ी जा रही है। तीन मौतें संभागायुक्त ने स्वयं स्वीकारी हैं लेकिन मीडिया आधा दर्जन से ज्यादा मौतें रिपोर्ट कर रहा है। गुप्ता ने बताया कि मरीजों के परिजन बता रहे हैं कि इलाज में अव्यवस्था और लापरवाही का बोलबाला है परिस्थितियों के लिए यही हालत जिम्मेदार है। बुंदेलखंड के अन्य क्षेत्रों से आए मरीजों की हालत दयनीय है उनके साथ हो रहे व्यवहार के कारण कानून व्यवस्था की स्थितियां पैदा हो रही हैं। कई परिजनों ने शिकायत की है कि उनके मरीजों की मृत्यु ऑक्सीजन हटा लेने या समाप्त हो जाने के कारण हुई है। कांग्रेस नेता ने कहा है कि अब वास्तव में सत्याग्रह का समय है सच्चे आंकड़ों के आधार पर सरकार आपातकालीन योजनाएं बनाए। आंकड़ों को छुपाने और मिथ्या रिपोर्टिंग से परिजनों में व्याप्त हताशा और तनाव बढ़ रहा है। सरकार को शिकायतों को अनदेखा करने की बजाय निराकरण करने के लिए प्रशासन को प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने कहा इन भीषण परिस्थितियों में भी जूनियर डाक्टरों की हड़ताल समाप्त कराने में सरकार बातचीत शुरू नहीं कर सकी है। मंत्री सारंग ने मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 12 अप्रैल को उन्हें समय दिया है। यह सरकार की मंशा पर प्रश्न खड़े करता है। आज की परिस्थितियों में जूनियर डाक्टरों से तत्काल बातचीत करना चाहिये। इंतजार करना किसी त्रासदी को आमंत्रित करना भी हो सकता है। हिन्दुस्थान समाचार/ नेहा पाण्डेय

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