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Saturday, March 14, 2026
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‘सिद्ध संतों के साथ अभद्रता बेहद निंदनीय’ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर भड़के सपा सांसद अफजाल अंसारी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायियों के साथ पुलिस और मेला प्रशासन की धक्का-मुक्की की घटना ने विवाद खड़ा कर दिया है। अब इस घटना पर सांसद अफजाल अंसारी ने कड़ा विरोध जताया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई हाथापाई की घटना ने सियासी हलचल पैदा कर दी है। इस विवाद पर गाजीपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी ने कड़ा विरोध जताया और इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

”यह व्यवहार धार्मिक प्रतिष्ठा और पवित्र परंपराओं के खिलाफ”

अफजाल अंसारी ने कहा कि सरकारी अधिकारियों का व्यवहार न केवल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति अनुचित था, बल्कि संतों, तपस्वियों, महंतों, सिद्ध संतों और दंडी साधुओं के साथ भी अभद्रता हुई। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की तीखी निंदा करते हुए इसे निंदनीय और अस्वीकार्य बताया। सांसद ने स्पष्ट किया कि यह व्यवहार धार्मिक प्रतिष्ठा और पवित्र परंपराओं के खिलाफ है और इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

मौनी अमावस्या पर कैसे हुआ विवाद?

दरअसल, मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने करीब 200 अनुयायियों के साथ संगम तट की ओर निकले। इस दौरान वे पालकी पर सवार होकर ओर बढ़ रहे थे, तभी मेला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इस दौरान उनके अनुयायियों ने बैरियर तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिससे पुलिस और उनके समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है।

”श्रद्धालुओं को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा”

पुलिस प्रशासन का कहना है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद रथ के साथ संगम की ओर बढ़ना चाहते थे, लेकिन भीड़ में भगदड़ की संभावना को देखते हुए अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, जो असफल रही। आरोप है कि उनके समर्थकों ने बच्चों को आगे भेजा, जिससे स्थिति और भी अव्यवस्थित हो गई। इसके अलावा, उनके अनुयायियों ने लगभग तीन घंटे तक वापसी का मार्ग भी अवरुद्ध किया, जिससे मेले में आए श्रद्धालुओं को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जताई नाराजगी

घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गहरा रोष व्यक्त किया और बिना गंगा स्नान किए ही अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ कहा कि जब तक प्रशासन उन्हें निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आगे नहीं ले जाता, वे स्नान नहीं करेंगे। वहीं, पुलिस प्रशासन ने स्वामी के इस व्यवहार को परंपरागत नियमों के खिलाफ बताया और कहा कि इस पर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम ने मेले में अतिरिक्त तनाव उत्पन्न कर दिया है और प्रशासनिक चुनौतियों को भी बढ़ा दिया है।

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