नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस भेजकर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। नोटिस में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया है कि जब ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर मामला अदालत में विचाराधीन है, तो वह खुद को इस पद पर कैसे प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जब तक हाईकोर्ट पट्टाभिषेक को लेकर कोई अंतिम आदेश नहीं देता, तब तक कोई भी व्यक्ति स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य नहीं कह सकता।
मौनी अमावस्या से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी परंपरागत पालकी यात्रा के जरिए संगम स्नान के लिए जा रहे थे। आरोप है कि मेला प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देकर उनकी पालकी यात्रा को बीच रास्ते में रोक दिया और वहीं उतार दिया। इसी बात से नाराज़ होकर शंकराचार्य उसी स्थान पर धरने पर बैठ गए और तब से उनका विरोध लगातार जारी है। धरने पर बैठे शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू धर्म में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति गंगा-यमुना में स्नान का अधिकार रखता है, लेकिन उनसे यह अधिकार भी छीन लिया गया। उन्होंने इसे परंपरा, आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा आघात बताया। उन्होंने कहा, “हम अपनी लड़ाई अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में लड़ रहे हैं।
28 घंटे से अनशन, पानी तक त्यागा
शंकराचार्य अपने शिविर में नहीं बल्कि सड़क किनारे फुटपाथ पर ही धरने पर बैठे हैं। मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज के अनुसार, शंकराचार्य पिछले 28 घंटे से अनशन पर हैं। उन्होंने न तो अनाज का एक दाना खाया है और न ही पानी पिया है। कड़ाके की ठंड के बावजूद उन्होंने उसी स्थान पर पूजा-पाठ और दंड तर्पण किया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बातचीत कर समर्थन जताया। अखिलेश यादव ने कहा कि वह जल्द ही प्रयागराज आकर उनसे मुलाकात करेंगे और उनके साथ खड़े हैं। इस राजनीतिक समर्थन के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। मौनी अमावस्या के दिन यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता और मेला अधिकारियों के साथ शंकराचार्य के शिष्यों की बहस हुई थी। शिष्यों ने अधिकारियों पर मारपीट का आरोप भी लगाया था। इसके बाद शंकराचार्य ने संगम स्नान करने से ही इनकार कर दिया था। शंकराचार्य का कहना है कि जब तक मेला प्रशासन के अधिकारी स्वयं आकर माफी नहीं मांगते और उन्हें सम्मानपूर्वक संगम स्नान नहीं कराते, तब तक वह धरना समाप्त नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में जब भी प्रयागराज आएंगे, शिविर के अंदर नहीं रहेंगे और संगम स्नान भी नहीं करेंगे।





