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Tuesday, March 17, 2026
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उमर खालिद के पिता का बड़ा बयान: कन्हैया कुमार पर राजनीतिक दबाव के कारण चुप्पी, नारेबाजी पर सवाल

उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि जेएनयू नारेबाजी मामले में उनके बेटे पर राजनीतिक निशाना बनाया गया, जबकि कन्हैया कुमार राजनीतिक दबाव के कारण इस मुद्दे से खुद को अलग रख रहे हैं।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में हुई नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के मामले में उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अब विरोध प्रदर्शन करना जैसे अपराध बन गया है, जबकि बलात्कारियों और दोषी अपराधियों को आसानी से जमानत मिल जाती है।

”यह असल में राजनीतिक साजिश का हिस्सा है”

सैयद कासिम ने बताया कि उमर खालिद और शरजील इमाम को मिली जमानत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ था, जिसमें कुछ नारे लगाए गए, लेकिन कोई भी बयान जारी नहीं किया गया। उन्होंने कहा, उनका गुस्सा या विरोध किसी हिंसक रूप का नहीं था। फिर भी उन पर FIR दर्ज कर चार्जशीट तैयार कर दी गई। यह असल में राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।

उमर खालिद के पिता ने आरोप लगाया

उमर खालिद के पिता ने आरोप लगाया कि सबूतों की कमी और उमर खालिद के दंगों के दौरान वहां उपस्थित न होने के बावजूद उन्हें और अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया गया। वहीं, उसी एफआईआर में कुछ अन्य आरोपियों को जमानत दे दी गई। उन्होंने इसे राजनीतिक निशाना बताया।

”उमर खालिद के मामले पर खुलकर सवाल नहीं उठा पा रहे हैं कन्हैया”

कन्हैया कुमार के संबंध में सैयद कासिम ने कहा कि वह फिलहाल एक राजनेता हैं और पार्टी से जुड़े होने के कारण राजनीतिक दबावों की वजह से उमर खालिद के मामले पर खुलकर सवाल नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट है कि कन्हैया कुमार और उमर खालिद जेएनयू में सहपाठी थे और 2016 की एफआईआर में दोनों को आरोपी बनाया गया था। इसके बावजूद कन्हैया कुमार इस पूरे मामले से खुद को दूर रख रहे हैं। यह काफी अजीब है, लेकिन उनकी राजनीतिक मजबूरियां उनके पैरों में बेड़ियां बन गई हैं।

”शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है”

सैयद कासिम ने आगे कहा कि वर्तमान स्थिति में छात्रों और युवा वर्ग के लिए विरोध प्रदर्शन करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उनका मानना है कि जब देश में गंभीर अपराधों के आरोपी आसानी से जमानत पा सकते हैं, तो शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति और व्यक्तिगत हितों के कारण कई लोग असल मुद्दों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। सैयद कासिम के अनुसार, यदि राजनीतिक दबाव न होता तो उमर खालिद जैसे छात्रों के मामलों पर न्यायपालिका और प्रशासन सही ढंग से कार्रवाई करता।

”अभिव्यक्ति की आज़ादी पर कोई बाधा न आए”

इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि उमर खालिद के परिवार के लिए न्याय और राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच संतुलन अब भी एक बड़ी चुनौती है। उनके पिता का कहना है कि समाज और न्यायपालिका को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर कोई बाधा न आए।

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