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Monday, March 16, 2026
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कश्मीर पर शहबाज शरीफ का झूठा दावा, X फैक्ट चेक कर खोली पोल, कहा- ये तो Misleading…

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 27 अक्टूबर 1947 की घटना को भ्रामक तरीके से पेश करके जम्मू-कश्मीर पर अपना दावा पेश कर रहे थे। लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने उनकी यह कोशिश नाकाम कर दी।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । फेक न्यूज़ फैलाने में पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व भी पीछे नहीं रहता। 27 अक्टूबर को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर को लेकर झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश की, जो भारत विरोधी नापाक मुहिम का हिस्सा मानी जा रही है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर विवाद खड़ा कर रही है।

शहबाज शरीफ ने कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताकर भारत पर अतिक्रमण का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में ‘मानवाधिकार उल्लंघन’ हो रहे हैं, जो एकतरफा और भारत विरोधी बयान के रूप में देखा जा रहा है।

मामले में X ने उठाया सख्‍त कदम 


इस पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने सख्त कदम उठाया और फैक्ट-चेक के बाद पीएम शहबाज के दावे को भ्रामक न्यूज (Misleading News) करार दिया। इसके बाद X पर शहबाज के बयान को लेकर उन्हें कड़ी आलोचना और जमकर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।

27 अक्टूबर को पाकिस्तान हर साल दुनिया भर में कश्मीर का झूठा रोना रोता है। वह दुष्प्रचार फैलाता है कि 78 साल पहले इसी दिन भारतीय सेना श्रीनगर पहुंची और वहां कब्जा कर लिया। पाकिस्तानी इसे बढ़ा-चढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश करते हैं।

शहबाज शरीफ ने भारत में लगाए आक्रमण के आरोप


इस बार भी शहबाज शरीफ ने वही किया। उन्होंने अपने आधिकारिक X हैंडल से एक पोस्ट साझा की, जिसमें कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताकर भारत पर आक्रमण का आरोप लगाया और दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में ‘मानवाधिकार उल्लंघन’ हो रहे हैं।

X ने दिया भ्रामक खबर करार


लेकिन X की कम्युनिटी नोट्स ने इसे झूठा करार देते हुए तुरंत फैक्ट-चेक जारी किया, जिससे शरीफ की साजिश फेल हो गई। प्रतिक्रिया में कहा गया, “यह भ्रामक खबर है। महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर को भारत में शामिल करने के लिए राजी किया था।”

अब जानिए 27 अक्टूबर 1947 का वो पूरा मामला 


बता दें कि 1947 में भारत के विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत थी, जिसे स्वतंत्र रहने या भारत/पाकिस्तान में शामिल होने का विकल्प मिला था। उस समय के शासक महाराजा हरि सिंह शुरू में स्वतंत्र रहने के पक्ष में थे। लेकिन 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान समर्थित कबायली लश्कर पश्तून जनजातियों और पाकिस्तानी घुसपैठियों की ताकत ने मुजफ्फराबाद और डोमेल होते हुए श्रीनगर की ओर आक्रमण शुरू कर दिया।

पाकिस्तान कबायली हमलावरों की आड़ में जम्मू-कश्मीर पर कब्जा करना चाहता था। इन लड़ाकों ने 26 अक्टूबर तक उरी और बारामूला पर कब्जा कर लिया था, जबकि श्रीनगर महज 50 किमी दूर था। महाराजा हरि सिंह की सेना पाकिस्तानियों से संघर्ष कर रही थी, लेकिन संख्या और हथियारों में कमजोर थी।

महाराजा हरि सिंह ने वी.पी. मेनन, भारत के गृह मंत्रालय के सचिव, से मदद मांगी। भारत ने कहा कि सेना तभी भेजी जाएगी जब जम्मू-कश्मीर कानूनी रूप से भारत में शामिल हो। इसके बाद 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए, जिससे जम्मू-कश्मीर कानूनी रूप से भारत का हिस्सा बन गया।

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