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Tuesday, March 17, 2026
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Mahashivratri 2025: क्या महाशिवरात्रि को हुआ था शिव-पार्वती का विवाह? जानें क्या कहता है शिव पुराण

इस साल 26 फरवरी को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार Mahashivratri 2025 में 26 फरवरी को मनाया जाएगा। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, यह त्योहार फाल्गुन महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। हालांकि, हर महीने भी एक शिवरात्रि आती है। हर महीने कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। तो फिर महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में अंतर क्या है?

क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि?

शिव पुराण के मुताबिक, भगवान शिव महाशिवरात्रि की तिथि यानी फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। सबसे पहले भगवान विष्णु और ब्रह्मा ने उनकी पूजा की थी। बता दें कि हिंदू धर्म में ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी शिव को त्रिदेव के रूप में पूजा जाता है। ईशान संहिता में भी लिखा है कि महाशिवरात्रि की तिथि पर भगवान शिव प्रकट हुए थे।

क्या महाशिवरात्रि को हुआ था शिव-पार्वती का विवाह?

कई लोग ये मानते हैं कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह महाशिवरात्रि को हुआ था, जबकि ऐसा नहीं है। उनका विवाह अगहन महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया को हुआ था। हालांकि, एक मान्यता यह भी है कि शिवलिंग में शिव और शक्ति दोनों का वास होता है। इसलिए इस दोनों की पूजा अर्चना की जाती है।

क्या होती है शिवरात्रि?

हिंदू धर्म में हर तिथि एक देव को समर्पित है। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भगवान शिव को समर्पित है। इसलिए हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है और भगवान शिव की पूजा की जाती है।

महाशिवरात्रि के दिन इस विधि के अनुसार करें पूजा 

महाशिवरात्रि के दिन आपको प्रातः काल उठकर स्नान करना चाहिए। उसके बाद भगवान भोलेनाथ की मंदिर जाएं और वहां व्रत का संकल्प लें। भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र चंदन बहुत पसंद है इसीलिए जल चढ़कर बेलपत्र और चंदन का लेप लगाए। और धतूरा,धतूरा का फूल भांग के पत्ते भांग के पत्ते भगवान भोलेनाथ को चढ़ाएं। भगवान को भोग में खोवा का लड्डू चढ़ाए। क्योंकि खोवा का लड्डू सफेद कलर का होता है और भगवान को सफेद रंग काफी पसंद है। इसके बाद भगवान की आरती करें और प्रसाद सबको दें और स्वयं भी ग्रहण करें। 

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