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Monday, March 30, 2026
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Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन पर अपनाएं ये नियम, भाई की उम्र और सौभाग्य दोनों में होगी वृद्धि

रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और रक्षा के वचन का पवित्र पर्व है, जो आपके परिवार में सुख, शांति, और समृद्धि का प्रकाश फैलाएगा।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित रक्षाबंधन का त्योहार कुछ ही दिनों में पूरे देश में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।इस साल यह पर्व 9 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। यह सिर्फ एक धागा बांधने की परंपरा नहीं है बल्कि भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। हर साल रक्षाबंधन के समय एक सवाल जरूर रहता है कि राखी बांधने का सही समय क्या है और क्या भद्रा का असर रहेगा। तो आइए जानते है ज्योतिषाचार्य पंडित जयपुरी से इस वर्ष रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त । 

ज्योतिषाचार्य जयपुरी के अनुसार, राखी बांधने 9 अगस्त को शुभ मुहूर्त सुबह 5:47 से दोपहर 1:24 तक रहेगा, इस बार भद्रा का साया नहीं रहेगा । इसके बाद दोपहर 2 बजकर 15 मिनट तक सौभाग्य योग और ब्रह्म मुहूर्त का संयोग रहेगा। फिर उसके बाद शोभन योग शुरू हो जाएगा। 

इस बार नहीं रहेगा भद्रा

पंडित ने स्पष्ट किया कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा, न ही कोई ग्रहण का असर होगायानी इस बार रक्षाबंधन पर कोई रुकावट नहीं आएगी । और बहनें पूरे विधि-विधान से अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी। उन्होंने बताया कि इस बार ब्रह्म मुहूर्त में भाई स्नान और ध्यान करके पूजा-पाठ के बाद बहन के घर जाए। बहन पूजा की थाली तैयार करके उसमें हल्दी लगे पीले चावल, मिठाई, घी का दीपक, धूप और रक्षासूत्र रखे। 

पूजा के समय पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुंह करके भाई को बैठाए, फिर सबसे पहले सिर पर रुमाल को ढककर पहले तिलक लगाए, फिर अक्षत चढ़ाए और मिठाई खिलाकर राखी बांधे. यह प्रक्रिया श्रद्धा के साथ करनी चाहिए ताकि भाई-बहन के रिश्ते में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.

राखी बांधते समय इस मंत्र का करें जाप

पंडित जयपुरी के अनुसार, राखी बांधते समय बहन को एक विशेष मंत्र का उच्चारण करना चाहिए, येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः,तेन त्वां मनु बध्नामि, रक्षे माचल माचल इससे भाई की आयु लंबी होती है व उसके ऊपर आनेवाली हर विपदा टलती है। ये महज एक परंपरा नही बल्कि, इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है।

बता दे, रक्षाबंधन का त्योहार त्रेतायुग के राक्षस कुल में जन्मे राजा बलि की कहानी से भी जुड़ा है राजा बलि एक महान दानी और शक्तिशाली राजा थे। जिन्होनें कई यज्ञ करके स्वर्ग पर अधिकार करने की कोशिश की थी। तब देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी और भगवान ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान में दे दी। भगवान विष्णु ने पहले पग में आकाश, दूसरे में पाताल को नाप लिया और तीसरे पग के लिए जब जगह नहीं बची तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। राजा बलि की इस दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनसे वरदान मांगने को कहा,तब राजा बलि ने वर मांगा कि भगवान विष्णु उनके साथ पाताल लोक में रहें और भगवान ने अपने वचनानुसार, पाताल में निवास ले लिया। इससे देवी लक्ष्मी बहुत चिंतित हुईं अपने पति को वापस लाने के लिए उन्होंने भगवान शिव से सहायता मांगी भगवान शिव ने उन्हें प्रिय वासु नाग का रक्षासूत्र दिया। जिसके बाद लक्ष्मी एक नाग कन्या के रूप में राजा बलि के पास गईं और उन्हें भाई मानते हुए राखी बांधी। बदले में उन्होंने भगवान विष्णु को वापस भेजने का वचन लिया इस प्रकार लक्ष्मी जी द्वारा राजा बलि को राखी बांधने की यह कथा रक्षाबंधन के पर्व से जुड़ी हुई है।

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