नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष सरकार के खिलाफ लामबंद है। विपक्ष ने संसद भवन से लेकर चुनाव आयोग तक विरोध मार्च के बाद महागठबंधन ने होटल ताज पैलेस में डिनर पार्टी आयोजित की है। इस डिनर पार्टी में कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, आरजेडी, शिवसेना (उद्धव गुट), डीएमके, यहां तक कि आम आदमी पार्टी के नेता भी शामिल हुए।
इस डिनर पार्टी के बाद राजनीतिक जानकार अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। ऐसे में 6 ही महीनों बाद होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Chunav 2025) के लिए रणनीति बनाने के संकेत साफ दिखाई दिए। इस डिनर पार्टी के बहाने यह बैठक महज एक ‘राजनीतिक जमावाड़ा’ नहीं थी, बल्कि इसमें राहुल गांधी के मिशन में खरगे की भूमिका को लेकर एक स्पष्ट संदेश छिपा था। दलित वोट बैंक को साधना और बिहार जैसे जातिगत समीकरण वाले राज्यों में विपक्षी एकजुटता को मजबूती देना।
‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं का जमावाड़ा
ऐसे में कहा जा सकता है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी के लिए अब सिर्फ एक संगठनात्मक प्रमुख नहीं, बल्कि ‘तुरुप का इक्का’ साबित हो रहे है। राहुल गांधी, लगातार दलितों और सवर्णों को साथ लेकर चुनावी समीकरण साधने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार जैसे-राज्य में जहां जातीय आधार पर वोटिंग पैटर्न मजबूत है, वहां खरगे का दलित चेहरा कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन को अतिरिक्त बढ़त दिला सकता है।
उत्तर भारत में कांग्रेस की छवि को मजबूत करना
कई मौको पर राहुल गांधी को खरगे का बचाव करते हुए देखा गया है। राहुल गांधी खरगे की भाषाई गलतियों को भी राजनीतिक हमलों से बचाते रहे है। खरगे पर राजनीतिक तौर पर हमले किए जाने पर राहुल ने यह तर्क दिया कि दलित नेतृत्व पर सवाल उठाना असल में सामाजिक प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाना है। ऐसे में राहुल का यह साफ संदेश है कि, खासकर उत्तर भारत के ग्रामीण और दलित बहुल क्षेत्रों में, कांग्रेस की छवि को मजबूती देने का प्रयास है।
डिनर में खरगे का साफ मैसेज
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे इस अभियान का मुख्य चेहरा है। और वह दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के बीच यह संदेश ले जा रहे हैं कि चुनावी प्रक्रिया से उन्हें वंचित करने की कोशिश हो रही है। डिनर में शरद पवार, सोनिया गांधी, अखिलेश यादव, डिंपल यादव, जया बच्चन, मीसा भारती, संजय राउत, प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे नेताओं की मौजूदगी ने साफ किया कि विपक्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भी अपने नेटवर्क को सक्रिय रखना चाहता है। हर एक मुद्दे पर एकत्रित होकर सरकार से मुकाबला कर सकें।
लोकसभा चुनाव में बाद INDIA ब्लॉक से दूरी बना चुकी आम आदमी पार्टी भी इस पार्टी में शामिल हुई। इस अभियान में पार्टी की और से संजय सिंह और संदीप पाठक की उपस्थिति यह संकेत है कि ‘इंडिया’ के दायरे को लचीला रखकर मुद्दा-आधारित एकजुटता को प्राथमिकता दी जाएगी।
चुनाव आयोग को लेकर चिंतन और चर्चा में लगे लोग
विपक्ष लगातार चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहा है। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ तौर कहा, ‘जिन लोगों को कांग्रेस पर विश्वास नहीं था या जो कांग्रेस के समर्थक नहीं हैं, वे भी देशभर में हो रहे इस मतदाता धोखाधड़ी पर चर्चा और चिंतन करने लगे हैं।’
”राहुल गांधी के खुलासे के बाद सतर्क हुए लोग”
इस मौके पर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, ‘चुनाव हो रही धांधली पर राहुल गांधी ने सबूत दिया है। एक विपक्षी नेता के रूप में उन्होंने ऐसा प्रमाण पेश किया है जिसे खारिज नहीं किया जा सकता है, आज आपने देखा होगा कि राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देशभर में जनजागृति आई है। लोग सतर्क हो गए हैं और खुद चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जा रहे हैं।’
‘चुनाव आयोग के खिलाफ लामबंद विपक्ष’
विपक्ष लगातार चुनाव आयोग के खिलाफ लामबंद है। इस मौके पर कांग्रेस सांसद गुलाम अहमद मीर ने कहा, ‘अब चुनाव आयोग को अपराधबोध हो रहा है। आयोग की जिम्मेदारी हमेशा से मुक्त और निष्पक्ष चुनाव कराना रही है, लेकिन पिछले 8-10 सालों में कई रिपोर्टें सामने आई हैं। सिर्फ चार दिन पहले राहुल गांधी ने बड़ी मेहनत के बाद इसका एक नमूना पेश किया। अगर यह जांच आगे बढ़ी, तो भगवान ही जानता है कि और क्या सामने आएगा।’
सपा के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी ने कहा, ‘चुनाव आयोग किसी भी सवाल का जवाब नहीं देता। हमारी पार्टी की ओर से 18,000 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन एक का भी जवाब नहीं आया।’
लोकतंत्र को खत्म नहीं होने देंगे हम
पार्टी सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, ‘चुनाव आयोग सरकार की गोद में जाकर बैठ गया है, सब कुछ सरकार के इशारे पर हो रहा है। सरकार और चुनाव आयोग मिलकर लोकतंत्र खत्म करने का काम कर रहे हैं। लेकिन हम किसी भी हालत में लोकतंत्र को खत्म नहीं होने देंगे।’
बिहार चुनाव को लेकर साफ संदेश
उधर, राजद सांसद मीसा भारती ने कहा, ‘प्रदर्शन के दौरान सांसदों के साथ बदसलूकी हुई और तीन महिला सांसद बेहोश हो गईं। चुनाव आयोग मिलना नहीं चाहता। ऐसे में आयोग सरकार के प्रेशर में काम कर रहा है।’
विपक्षी इंडिया गठबंधन के लिए यह महज विरोध-प्रदर्शन का मार्च और डिनर पार्टी नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले का ‘ट्रायल रन’ है। इस अभियान का मुख्य चेहरा बनाकर खरगे को आगे रखकर कांग्रेस साफ करना चाहती है कि सामाजिक न्याय और जातीय संतुलन उसके चुनावी एजेंडे के केंद्र में है।
पार्टी का सामाजिक समीकरण दोहराने की कोशिश
बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर में इंदिरा गांधी ने जैसे दलितों और सवर्णों को साथ लेकर मजबूत जनाधार बनाया था, वैसे ही राहुल गांधी भी इन समुदायों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि विपक्षी गठबंधन में यह सामाजिक समीकरण दोहराया जाए और इसमें मल्लिकार्जुन खरगे उनका सबसे मजबूत पत्ता हैं।




