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Sunday, March 22, 2026
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ग्राम पंचायतों में बने अंत्येष्टि स्थल वीरान, गंगा घाट बने सहारा

18-18 लाख खर्च, फिर भी जनता को नहीं मिल रहा लाभ मीरजापुर, 17 मई (हि.स.)। जिंदगी सारी बीत गई जद्दोजहद में, अंतिम यात्रा भी न रही सकून भरी। कुछ ऐसा ही हाल पटेहरा ब्लाक में बने अंत्येष्टि स्थलों का है। जहां मरने के बाद लोगों की अंत्येष्टि आसानी से नहीं हो पाती। यह हालात तब है जब ग्राम पंचायतों में सरकार ने 18-18 लाख रुपये खर्च कर अंत्येष्टि स्थलों का निर्माण कराया है। जिम्मेदारों की उपेक्षा के चलते अंत्येष्टि स्थल वीरान पड़े हैं और परिजनों को आर्थिक तंगी के बावजूद जेब ढीली करनी पड़ रही है। विकास खंड राजगढ़ और पटेहरा कला के चार ग्राम पंचायतों में 18-18 लाख रुपये की लागत से अंत्येष्टि स्थल का निर्माण जरूर करा दिया गया है। लेकिन अव्यवस्था के चलते इन स्थलों में अभी तक एक भी शव का दाह संस्कार नहीं हो पाया है। इसके चलते ग्रामीणों को गंगा किनारे शहर के घाटों पर शवदाह करने के लिए मजबूरन जाना पड़ता है। क्षेत्र के अमोई पूरवा, मरचा, गोपलपुर और पटेवर ग्रामसभा में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराया गया है। इस निर्माण के लिए आए धन के बंदरबांट के चलते मूर्तरूप नहीं ले पाए और अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। इधर कुछ दिनों से अव्यवस्थाओं के बीच ही गोपलपुर में परिजनों ने शवदाह करना शुरू कर दिया है। निवर्तमान ग्राम प्रधान ने महज कुछ चहारदीवारी और घटिया किस्म का टीनशेड लगवाया है। वहीं पटेवर ग्रामसभा में बिना सड़क मार्ग की जंगल किनारे अंत्येष्टि स्थल का निर्माण तो जरूर करा दिया गया, लेकिन न तो वहां पानी की व्यवस्था है और ना ही विद्युत की। जबकि विद्युत ताप केंद्र से ही शवदाह होते हैं, लेकिन यहां पर तो विद्युत की व्यवस्था नहीं हो पाई है। ग्रामीणों को शहर का रुख करना पड़ता है। उपजिलाधिकारी मड़िहान रोशनी यादव ने कहा कि क्षेत्र में अंत्येष्टि स्थल के लिए समस्या नहीं होने पाएगी। खंड विकास अधिकारियों से वार्ता कर सभी अंत्येष्टि स्थल को दुरुस्त कराया जाएगा। मड़िहान तहसील के पटेहरा ब्लाक में चार अंत्येष्टि स्थल बनाए गए हैं। प्रति अंत्येष्टि स्थल 18 लाख की लागत से बनाए गए हैं। इसका निर्माण ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान एवं जिम्मेदारी ग्राम विकास अधिकारी की है। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/विद्या कान्त

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