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पेयजल ऑडिट रिपोर्ट : महानगर में 55 लीटर के सापेक्ष आधे से भी कम मिल रहा लोगों को जल

झांसी, 15 जून(हि.स.)। जनपद की एक समाजसेवी संस्थान की टीम ने झंसी शहर के पेयजल संकट ग्रस्त 07 बस्तियों में ‘पेयजल आकेक्षण’ किया गया। इस दौरान संकट ग्रस्त 104 परिवारों से टीम के लोगों ने साक्षात्कार लिया। फोकस ग्रुप्स डिस्कसन एवं मौके पर जाकर स्थिति आंकलन के द्वारा जानकारियां प्राप्त कर पेयजल अध्ययन किया गया। इसमें पाया कि महानगर में प्रति व्यक्ति को 55 लीटर जल प्रतिदिन मिलने का अधिकार है। जबकि इससे आधा जल भी प्रति व्यक्ति को प्राप्त नहीं हो रहा है। महानगर की जनसंख्या 6 लाख के लगभग है। लोगों की प्यास बुझाने के लिए महानगर में पाइपलान सप्लाई के साथ 29 ट्यूबवेल लगे हैं और 3286 हैंडपंप है। पानी की आवश्यकता 78.51 एमएलडी की है, जबकि पानी की उपलब्धता 65.47 एमएलडी है। एक एमएलडी में 10 लाख लीटर पानी होता है। चूंकि पूरे शहर में पानी की पाइपलाइन नहीं डाली गई है और संकट ग्रस्त क्षेत्र की पाइप लाइन में पानी नहीं आ रहा है। ऑडिट में पाया कि 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के अनुसार 674 व्यक्तियों को 37070 लीटर पानी की आवश्यकता है। इन लोगों को मात्र 16095 लीटर पानी 43 प्रतिशत प्रतिदिन मिल रहा है जो सरकारी मानक अनुरूप बहुत कम है। ये मोहल्ले हैं समस्याग्रस्त वर्तमान में महानगर के 20 मुहल्लों (लक्ष्मण गंज, बिसात खाना, दारीगरन, अलीगोल खिड़की बहार, दतिया गेट बहार, उन्नाव गेट बहार, बड़ा गांव गेट बहार, मुकरयाना, बांग्ला घाट, गुदरी, गुमनावारा, नगरा, सीपरी बाजार, मसीहागंज, ग्वाल टोली, चार खम्बा, सराय, राजगढ़, भाड़ेर गेट बाहर,सत्यम कलौनी, अन्नपूरना कलौनी) में पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। वही असमय टैंकरों का आना लोगों की मुसीबत बना हुआ है। 10 वर्ष में भीषण जल संकट इसी सन्दर्भ में जल जन जोड़ो के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने बताया कि झांसी शहर के मशहूर झरना तालाब, कोंछाभवर तालाब समाप्त हो गये हैं। शहर के कुंआ भी समाप्त हो गए हैं इसलिए भूगर्भ जल स्तर के लगातार नीचे गिरने से पेयजल की उपलब्धता में कमी आयी है। 10 वर्ष में यदि इस समस्या का समाधान ठीक से न किया गया तो मुसीबत भयंकर होगी। महानगर में संचालित पेयजल योजना झांसी महानगर पेयजल पुनर्गठन योजना का कार्य प्रगति पर है। इस योजना की कुल लागत 600.42 करोड़ रुपये है। माताटीला बांध से 195 एम् एल डी (मिलिनियम लीटर परडे) पेयजल उपलब्ध होगा। जियो मोर्फोलोजी और हाइड्रोलोजिकल जानकारी महानगर के पूर्व में वेतवा नदी तथा पश्चिम में पहूज नदी मुख रूप से है। शहर में मिक्सर और लाल मिट्टी राकड पडुआ,जमींन है। भूमि के अन्दर 60 मीटर चिकनी मिट्टी और कंकड़ है इसके बाद ग्रेनाईट पत्थर मिलता है। मुख्य रूप से डगवेल और ट्यूबवेल पेयजल के संसाधन है। डगवेल की गहराई 5.50 -25 मीटर और ट्यूबवैल 50 -100 मीटर गहराई पर स्थापित है। जिनमे जल स्तर बहुत तेजी से नीचे जा रहा है। पेयजल ऑडिट के निष्कर्ष लोगों के घरों में पाइप लाइन कनेक्शन है मगर कई सालों से पानी नहीं आ रहा है मगर जल संस्थान द्वारा 1200 रू वार्षिक बिल बरावर भेज रहा और लोग जमा भी कर रहे है। लोगों का यह भी कहना है 1992 के बाद शहर में स्थापित पानी वाली धर्मशाला के पुराव हो जाने से जल स्तर गिरने की समस्या बंद गयी है। 7 बस्तियों में 1760 परिवार पेयजल संकट से प्रभावित है। महानगर की 20 बस्तियों का अनुमान लगाये तो कुल शहर के 25 हजार परिवार पेयजल संकट से प्रभावित है। हिन्दुस्थान समाचार/महेश

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