नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। इस समय भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बॉर्डर-गावस्कर ट्रॅाफी सीरीज खेली जा रही है जो कि पहले टेस्ट मैच में भारत ने मेजबानी टीम को हरा कर बड़ी जीत दर्ज की है। सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच 6 दिसंबर यानी शुक्रवार को एडिलेट में खेला जाना है। वहीं भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज ने केएल राहुल ने अपने प्रदर्शन और बल्लेबाजी क्रम को लेकर बात की है।
पर्थ टेस्ट में दिखाया दम
उन्होंने बुधवार को कहा कि, मैने अब लाइन-अप में फ्लोटर तरीके से खेलने की मानसिक चुनौती से निपटना सीख लिया ह।, जब तक टीम के लिए खेलते रहेगे तब तक किसी भी क्रम में या स्थिति में बल्लेबाजी करने को तैयार है। केएल राहुल ने पर्थ टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था, और कप्तान रोहित शर्मा की गैर हाजिरी में पारी की शुरुआत करते हुए 26 और 77 रनों की शानदार पारी खेले थे। 32 वर्षीय बल्लेबाज ने केएल राहुल ने अब तक 54 टेस्ट मैचों में में 3000 से अधिक रन बनाकर भारतीय सलामी बल्लेबीजी के क्रम में गिने जाते है।
शुक्रवार से शुरू होने वाले डे-नाइट टेस्ट के लिए रोहित के प्लेइंग इलेवन में वापस आने के बाद, राहुल से उनकी वर्तमान की बल्लेबाजी स्थिति के बारे में सवाल पूछा गया। एडिलेड में भारत के प्रशिक्षण सत्र से पहले मीडिया से कहा, मैं सिर्फ प्लेइंग इलेवन में रहना चाहता हूं, जिसका मतलब है कि जहां भी हो। आप वहां जाएं और बल्लेबाजी करें और टीम के लिए खेलें।
टेस्ट और वनडे दोनों ही फार्मेट का प्रदर्शन
राहुल ने ऑस्ट्रेलिया में ठीक एक दशक पहले मध्यक्रम के बल्लेबाज के रूप में अपना टेस्ट करियर शुरू किया था, जो की बाद में खेल का प्रदर्शन कर अपने आप में निखार किया और टीम में ओपनिंग के लिए जगह बनाई। लेकिन इन सभी वर्षों में टेस्ट और वनडे दोनों ही फार्मेट में अपनी बल्लेबाजी से कुछ खास कारनामा नही कर पाए जिससे उनके उपर दबाव बना और मानसिक रूप से उसका असर उनके खेल पर पड़ा।
“मैंने कई पोजीशन पर बल्लेबाजी की”
उन्होंने अपनी उम्मीदों के बारे में कहा कि, “मैंने कई पोजीशन पर बल्लेबाजी की है। पर पहले थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है , तकनीकी रूप से नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी खुद पर दबाव होता है और उसी प्रेसर से पारी को आगे बढ़ाना एक कठिन पल होता है, मैं कितनी जल्दी आक्रमण कर सकता हूँ? मुझे कितना सतर्क रहने की आवश्यकता है? ये ऐसी चीजें थीं जो शुरू में मुश्किल थीं। लेकिन अब जब मैंने टेस्ट और वनडे में सभी जगह खेलना शुरु किया तो इससे मुझे यह अंदाजा हो गया है कि मैं अपनी पारी को कैसे मैनेज करना चाहता हूँ।





